नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता नियमों का दुरुपयोग करने के आरोप में एक पूर्व समाधान पेशेवर (आरपी) को धन शोधन विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यह जानकारी दी।
प्रवर्तन निदेशालय ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि दिवाला घोषित कंपनी ‘रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ के आरपी अरविंद कुमार को तीन फरवरी को हिरासत में लिया गया था। गुरुग्राम की एक विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने उन्हें आठ दिनों के लिए एजेंसी की हिरासत में भेज दिया।
बयान में कहा गया है कि भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने हाल ही में संबंधित उल्लंघनों के कारण आरपी का पंजीकरण दो साल के लिए निलंबित कर दिया था।
एक आरपी को दिवाला समाधान प्रक्रिया संचालित करने के लिए नियुक्त किया जाता है और वह कॉर्पोरेट दिवाला एवं समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के तहत कंपनी के लेनदारों और देनदारों के बीच बातचीत का प्रबंधन करता है।
यह मामला आरोपी कंपनी और उसके प्रवर्तकों द्वारा 2015 से 2018 के बीच किए गए 236 करोड़ रुपये के कथित तौर पर बैंक धोखाधड़ी से संबंधित है। कंपनी (रिचा इंडस्ट्रीज) बाद में दिवालिया हो गई और कुमार ने दिसंबर 2018 से जून 2025 के बीच इसके प्रतिनिधि के रूप में काम किया।
भाषा यासिर नरेश
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