‘डिजिटल अरेस्ट’ के तहत बुजुर्ग दंपति से 14 करोड़ से अधिक की ठगी के मामले में आठ गिरफ्तार

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‘डिजिटल अरेस्ट’ के तहत बुजुर्ग दंपति से 14 करोड़ से अधिक की ठगी के मामले में आठ गिरफ्तार

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  • Publish Date - January 24, 2026 / 05:04 PM IST,
    Updated On - January 24, 2026 / 05:04 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के तहत एक बुजुर्ग दंपति से 14 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी से जुड़े मामले में एक पुजारी समेत आठ लोगों को तीन राज्यों से गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने इस कार्रवाई में कंबोडिया और नेपाल से जुड़े साइबर ठगी गिरोह का भी भंडाफोड़ किया है। उन्होंने बताया कि आरोपियों को गुजरात, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से गिरफ्तार किया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, यह गिरोह कानून प्रवर्तन एजेंसियों का भेष धारण कर लोगों को डराता था और ‘म्यूल’ बैंक खातों के जरिये रकम हड़पता था।

‘म्यूल’ खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिसका इस्तेमाल अपराधी, खाताधारक की जानकारी से या जानकारी के बगैर, अवैध धन प्राप्त करने, धन अंतरित करने या उसे वैध बनाने के लिए करते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों में गुजरात के वडोदरा निवासी दिव्यांग पटेल (30) और कृतिक शितोले (26), ओडिशा के भुवनेश्वर निवासी महावीर शर्मा उर्फ नील (27), गुजरात निवासी अंकित मिश्रा उर्फ रॉबिन, उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले अरुण कुमार तिवारी (45) और प्रद्युम्न तिवारी उर्फ एसपी तिवारी (44) तथा लखनऊ निवासी भूपेंद्र कुमार मिश्रा (37) और आदेश कुमार सिंह (36) शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, पटेल और शितोले को 15 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।

उसने बताया, ‘पटेल ने सीए (इंटरमीडिएट) परीक्षा उत्तीर्ण की है। वह फ्लोरेस्टा फाउंडेशन नामक एक गैर-सरकारी संगठन का संचालन करता है और अपनी कंपनी ‘तत्व बिजनेस एडवाइजर्स’ के माध्यम से वित्तीय सेवाएं भी प्रदान करता है।’

पुलिस ने बताया कि शितोले के पास न्यूजीलैंड से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) में डिप्लोमा है।

उसने बताया कि अरुण कुमार तिवारी को 16 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था, वह बीए डिग्री धारक है और वाराणसी में आयकर कार्यालय के बाहर एक निजी ‘डेटा-एंट्री ऑपरेटर’ के रूप में काम करता है।

पुलिस के मुताबिक, अरुण ‘शिवाज चैरिटेबल फाउंडेशन’ नामक एक गैर-सरकारी संगठन का भी संचालन करता हैं।

पुलिस ने बताया कि शर्मा को 19 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और वह बीकॉम डिग्री धारक है।

अधिकारियों ने बताया कि 20 जनवरी को गिरफ्तार प्रद्युमन तिवारी पुजारी है और वाराणसी में घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न अनुष्ठान करता है।

पुलिस ने बताया कि 21 जनवरी को गिरफ्तार अंकित मिश्रा वाणिज्य में स्नातक है और एसबीआई कैप सिक्योरिटीज में ‘सेल्स एग्जिक्यूटिव’ के रूप में काम कर चुका है।

पुलिस के अनुसार, कुमार को भी 21 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था, जिसके पास एमबीए की डिग्री है और वह एक निजी कंपनी में कार्यरत था।

पुलिस ने बताया कि सिंह को भी उसी दिन गिरफ्तार किया गया था और वह छात्रों को ट्यूशन देता था।

यह मामला तब सामने आया, जब दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाली 77 वर्षीय महिला से कथित तौर पर 14.84 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।

पुलिस के मुताबिक, पीड़िता को दिसंबर 2025 में एक कॉल आया, जिसमें दावा किया गया कि उसके नाम पर जारी किया गया एक सिम कार्ड धनशोधन मामले से जुड़ा है।

इसके बाद, धोखेबाजों ने सीबीआई और पुलिस के अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करते हुए पीड़िता को वीडियो कॉल पर फंसाया, उसे एक जाली गिरफ्तारी वारंट दिखाया और फर्जी ‘अदालती कार्यवाही’ की।

पीड़िता और उसके पति को कथित तौर पर चौबीसों घंटे वीडियो निगरानी में रखा गया और किसी से भी संपर्क करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। डर और दबाव के कारण उन्हें यह कहकर धन अंतरित करने के लिए राजी किया गया कि पैसा वापस कर दिया जाएगा और इस तरह उन्होंने सावधि जमा और शेयर निवेश सहित बड़ी धनराशि अंतरित कर दी।

पुलिस ने बताया कि आठ लेनदेन के माध्यम से कुल 14.84 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।

विशेष प्रकोष्ठ के आईएफएसओ पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एक ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले की जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया गया।

तकनीकी निगरानी और बैंक खातों के विश्लेषण के माध्यम से पुलिस ने धन के लेन-देन का पता लगाया, जिससे कई संदिग्ध खाताधारकों का पता चला।

जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपियों ने अंतरराष्ट्रीय गिरोह के इशारे पर फर्जी खाते बनवाए और धोखाधड़ी से प्राप्त धन को अलग-अलग जगहों पर जमा किया।

पुलिस ने इस अभियान के दौरान सात मोबाइल फोन और कई चेकबुक जब्त कीं। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है।

भाषा राखी पारुल

पारुल