2026 के अंत तक ‘बहुत मजबूत’ हो सकता है अल नीनो, भारत के लिए बढ़ा जलवायु जोखिम : आईआरआई
2026 के अंत तक ‘बहुत मजबूत’ हो सकता है अल नीनो, भारत के लिए बढ़ा जलवायु जोखिम : आईआरआई
नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) कोलंबिया विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी (आईआरआई) ने यह अनुमान जताया है कि अल नीनो मौसम प्रणाली मजबूत हो रही है और 2026 के अंत तथा 2027 की शुरुआत में इसके ‘‘बहुत मजबूत’’ स्थिति में पहुंचने की आशंका है जिससे भारत के लिए बढ़ते जलवायु जोखिम को लेकर चिंता पैदा होती है।
आईआरआई ने 21 सितंबर को जारी अपने ताजा ईएनएसओ पूर्वानुमान में कहा कि प्रशांत महासागर के तापमान का प्रमुख संकेतक नीनो 3.4 सूचकांक सितंबर के मध्य में बढ़कर 3.0 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।
आईआरआई द्वारा अध्ययन किए गए सभी 22 मॉडलों—13 गतिशील और नौ सांख्यिकीय—ने 2026-27 की सर्दियों के दौरान ‘‘बहुत मजबूत’’ अल नीनो की स्थिति रहने का अनुमान जताया है।
संस्थान ने फरवरी 2027 तक अल नीनो की संभावना 100 प्रतिशत बताई है, जो 2027 के मध्य तक घटकर 61 प्रतिशत रह सकती है। आईआरआई ने कहा कि यह घटना अब तक दर्ज सबसे मजबूत अल नीनो घटनाओं में शामिल हो सकती है।
संस्थान ने यह भी अनुमान जताया है कि भारतीय महासागर द्विध्रुव (आईओडी) सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच काफी सकारात्मक हो सकता है और 2027 की शुरुआत में फिर सामान्य स्थिति की ओर लौट सकता है। आईआरआई के अनुसार, सकारात्मक आईओडी अक्सर अल नीनो के साथ होता है, हालांकि दोनों घटनाएं स्वतंत्र रूप से भी विकसित हो सकती हैं।
भारत में अल नीनो का संबंध आम तौर पर कमजोर मानसूनी बारिश से होता है और इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में आईओडी इसके प्रभाव को कम कर सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के लिए अल नीनो और सकारात्मक आईओडी का संयोजन महत्वपूर्ण है, क्योंकि अल नीनो का प्रभाव केवल नीनो 3.4 सूचकांक से निर्धारित नहीं होता। आईओडी, मानसूनी परिसंचरण, क्षेत्रीय समुद्री सतह का तापमान और सर्दियों के मौसम की स्थितियां भी इसमें भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आईआरआई का पूर्वानुमान बढ़े हुए जलवायु जोखिम का मजबूत संकेत है, लेकिन इससे भारत में बारिश या कृषि उत्पादन का सटीक पूर्वानुमान अपने आप नहीं लगाया जा सकता।’’
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का एक बड़ा हिस्सा असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। भारत के लिए इसका मतलब कभी-कभी कम मानसूनी बारिश, अधिक गर्म और शुष्क सर्दी तथा फसलों और जल उपलब्धता पर बढ़ता दबाव हो सकता है।
भाषा मनीषा नरेश
नरेश

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