नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) निर्वाचन आयोग द्वारा पांच विधानसभाओं के लिए रविवार को घोषित चुनाव कार्यक्रम में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं जिनमें कम चरण, 20 दिनों की संक्षिप्त मतदान अवधि और तीन मतदान दिवसों के बीच लंबा अंतराल और मतगणना में देरी शामिल है।
इन पांच विधानसभाओं के लिए 2021 में हुए चुनाव में लगभग एक महीने में कुल आठ मतदान दिवस थे, जबकि मतों की गिनती अंतिम मतदान तिथि के तीसरे दिन की गई थी।
इस बार मतदान के अंतिम दिन के बाद पांचवें दिन मतगणना की जाएगी।
मतदान के पहले दो चरणों (पहला दिन 9 अप्रैल और दूसरा दिन 23 अप्रैल) के बीच का अंतराल अधिक है, जबकि अंतिम मतदान दिवस 29 अप्रैल को होगा।
बिहार में नवंबर 2025 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भी दो मतदान दिवस 6 और 11 नवंबर के बीच कुल पांच दिन का अंतर था जबकि मतगणना तीन दिन बाद 14 नवंबर को हुई थी।
कुछ विपक्षी नेताओं का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एलपीजी संकट को लेकर जनता के गुस्से के कारण राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पश्चिम बंगाल में चुनाव में देरी चाहती थी, जबकि अन्य इसे भगवा पार्टी द्वारा वहां चुनाव प्रचार के लिए अधिक समय प्राप्त करने के रूप में देखते हैं।
इस बार चरणों को संक्षिप्त करने के बारे में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चरणों को कम करने और चीजों को ‘आसान’ बनाने की भावना थी।
भाषा धीरज नरेश
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