नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) कई प्रमुख समाचार पत्रों का नेतृत्व करने वाले प्रख्यात पत्रकार और राज्यसभा के पूर्व सदस्य एच.के. दुआ का बृहस्पतिवार अपराह्न लोधी रोड स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया।
उनके बेटे प्रशांत दुआ ने मुखाग्नि दी। इस दौरान प्रशांत की मां अदिति दुआ, कई प्रख्यात हस्तियां और वरिष्ठ पत्रकार मौजूद थे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एन.एन. वोहरा, पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार, पूर्व सांसद नरेश गुजराल और कई समाचार पत्रों और समाचार संगठनों के संपादक अंतिम संस्कार में उपस्थित थे।
दुआ ने बुधवार दोपहर एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे कुछ समय से बीमार थे और लगभग तीन सप्ताह पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी उम्र 88 वर्ष थी।
उनकी स्मृति में सात मार्च (शनिवार) की सुबह इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी।
चार दशकों से अधिक के अपने करियर में दुआ को चार समाचार पत्रों – द हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस, द टाइम्स ऑफ इंडिया और द ट्रिब्यून – का नेतृत्व करने का गौरव प्राप्त था।
उन्होंने दो प्रधानमंत्रियों – अटल बिहारी वाजपेयी और एचडी देवेगौड़ा – के मीडिया सलाहकार के रूप में भी काम किया था और बाद में एक राजनयिक और सांसद के तौर पर भी भूमिकाएं निभाईं।
पद्म भूषण से सम्मानित दुआ अपने मिलनसार व्यक्तित्व, तीक्ष्ण राजनीतिक अंतर्दृष्टि और संपादकीय स्वतंत्रता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते थे। राजनीतिक जगत में उनका व्यापक सम्मान था।
एक जुलाई, 1937 को जन्में दुआ ने डेनमार्क में भारत के राजदूत के रूप में भी कार्य किया (2001-03)।
उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया (2009-15), जहां उन्होंने विदेश मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर होने वाली बहसों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एन.एन. वोहरा ने कहा, “सौम्य स्वभाव और असाधारण स्पष्टता के धनी दुआ में घरेलू या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी खबर बनने वाली किसी भी घटना को भांपने की दुर्लभ अंतर्ज्ञान शक्ति थी और वे हमेशा इसके बारे में लिखने वाले पहले व्यक्ति होते थे।”
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने एच.के. दुआ के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें समसामयिक घटनाओं का एक कुशल पर्यवेक्षक बताया।
चिदंबरम ने कहा, “उनके लेखन से देश की सामाजिक और राजनीतिक वास्तविकताओं की उनकी गहरी समझ झलकती थी, और वे एक निष्पक्ष टिप्पणीकार थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।”
एक अन्य पूर्व केंद्रीय मंत्री, मनीष तिवारी ने दुआ के निधन की खबर सुनकर दुख व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, “दुआ ने मालिकों के चमचे बनने और विज्ञापनों के लिए नेताओं के सामने झुकने के बजाय अपने सिद्धांतों पर चलना चुना।”
पूर्व मंत्री ने कहा, “उन्हें सच को सच कहना आता था।”
भाषा
प्रशांत नरेश
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