नहीं रहे चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा, कोरोना का चल रहा था इलाज, निधन पर सीएम रावत ने जताया दुख

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नहीं रहे चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा, कोरोना का चल रहा था इलाज, निधन पर सीएम रावत ने जताया दुख

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  • Publish Date - May 21, 2021 / 08:48 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:10 PM IST

ऋषिकेश। मशहूर चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा का निधन हो गया। वह कोरोना पॉजिटिव थे और उनका इलाज ऋषिकेश एम्स में किया जा रहा था। जहां शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। निधन उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई।

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मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने निधन पर गहरा दुख जताया है। सीएम रावत ने लिखा कि चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्व में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध महान पर्यावरणविद् पद्म विभूषण सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक समाचार मिला। यह खबर सुनकर मन बेहद व्यथित हैं। यह सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण देश के लिए अपूरणीय क्षति है।

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पहाड़ों में जल, जंगल और जमीन के मसलों को अपनी प्राथमिकता में रखने वाले और रियासतों में जनता को उनका हक दिलाने वाले बहुगुणा जी के प्रयास सदैव याद रखे जाएंगे।

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पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1986 में जमनालाल बजाज पुरस्कार और 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। पर्यावरण संरक्षण के मैदान में सुंदरलाल बहुगुणा जी के कार्यों को इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। मैं ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिजनों को धैर्य व दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।

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<blockquote class=”twitter-tweet”><p lang=”hi” dir=”ltr”>चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्व में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध महान पर्यावरणविद् पद्म विभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक समाचार मिला। यह खबर सुनकर मन बेहद व्यथित हैं। यह सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण देश के लिए अपूरणीय क्षति है। <a href=”https://t.co/j85HWCs80k”>pic.twitter.com/j85HWCs80k</a></p>&mdash; Tirath Singh Rawat (@TIRATHSRAWAT) <a href=”https://twitter.com/TIRATHSRAWAT/status/1395646501888565252?ref_src=twsrc%5Etfw”>May 21, 2021</a></blockquote> <script async src=”https://platform.twitter.com/widgets.js” charset=”utf-8″></script>

70 के दशक में चलाया अभियान
महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलने वाले सुंदरलाल बहुगुणा ने 70 के दशक में पर्यावरण सुरक्षा को लेकर अभियान चलाया, जिसने पूरे देश में अपना एक व्यापक असर छोड़ा। इसी दौरान शुरू हुआ चिपको आंदोलन भी इसी प्रेरणा से शुरू किया गया अभियान था। तब गढ़वाल हिमालय में पेड़ों की कटाई के विरोध में शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन चलाया गया। मार्च 1974 को कटाई के विरोध में स्थानीय महिलाएं पेड़ों से चिपक कर खड़ी हो गईं, दुनिया ने इसे चिपको आंदोलन के नाम से जाना।

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