नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले में उन्हें आरोप मुक्त करने की निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सीबीआई की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को अलग करने का अनुरोध करते हुए रविवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया।
घटनाक्रम से परिचित सूत्रों ने बताया कि केजरीवाल के स्वयं उपस्थित होकर उस आवेदन पर बहस करने की उम्मीद है जिसकी सुनवाई सोमवार को होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक अन्य आरोप मुक्त किये गए लोगों द्वारा भी इसी तरह की याचिका दायर किए जाने की उम्मीद है।
दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय ने इससे पहले केजरीवाल के उस अनुरोध को खारिज कर दिया था जिसमें सीबीआई की याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से किसी अन्य न्यायाधीश को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने कहा था कि इस मामले से खुद को अलग करने का निर्णय संबंधित न्यायाधीश को लेना होगा।
केजरीवाल के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया और आबकारी नीति मामले में अन्य आरोपियों ने 11 मार्च को दिए गए एक अभ्यावेदन में दावा किया कि इस बात की ‘‘गंभीर, वास्तविक और उचित आशंका’’ है कि न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष मामले की सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ नहीं होगी।
सुनवाई अदालत ने 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को आरोप मुक्त कर दिया था। अदालत ने मामले की सुनवाई कर रही सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसका मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से खरा नहीं उतर सका और पूरी तरह से अविश्वासनीय साबित हुआ।
सुनवाई अदालत के फैसले के खिलाफ सीबीआई की ओर से दाखिल अपील पर नौ मार्च को सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में निचली अदालत की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण प्रतीत होते हैं और उन पर विचार करने की आवश्यकता है।
न्यायमूर्ति शर्मा की पीठ ने शराब नीति मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के संबंध में निचली अदालत की सिफारिश पर भी रोक लगा दी।
भाषा धीरज नरेश
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