शंभू सीमा पर फिर से प्रदर्शन शुरू करने के लिए जुटे किसान, पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े

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शंभू सीमा पर फिर से प्रदर्शन शुरू करने के लिए जुटे किसान, पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े

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  • Publish Date - February 14, 2024 / 09:29 AM IST,
    Updated On - February 14, 2024 / 09:29 AM IST

चंडीगढ़, 14 फरवरी (भाषा) किसान बुधवार सुबह एक बार फिर अपना ‘दिल्ली चलो’ मार्च शुरू करने के लिए अंबाला के पास शंभू सीमा पर एकत्र हुए, जिसके चलते भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे।

पंजाब के प्रदर्शनकारी किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली तक मार्च करने के अपने प्रयास में हरियाणा की सीमा पर बैरिकेड हटाने का नये सिरे से प्रयास किया।

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि जब कुछ किसान शंभू सीमा पर बैरिकेड के पास एकत्र हुए तो हरियाणा पुलिस ने बुधवार सुबह करीब आठ बजे आंसू गैस के कई गोले दागे।

मंगलवार को, प्रदर्शनकारी किसानों की पजांब-हरियाणा सीमा के दो बिंदुओं पर हरियाणा पुलिस के साथ झड़प हुई थी। किसानों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े थे और पानी की बौछार की थी।

मंगलवार को पुलिस के साथ कई घंटों तक चली झड़प के बाद किसान नेताओं ने दिन भर के लिए विरोध प्रदर्शन स्थगित कर दिया था। उन्होंने कहा कि वे बुधवार को शंभू सीमा से मार्च फिर से शुरू करेंगे।

मंगलवार को शंभू सीमा के पास किसानों ने सीमेंट से बने अवरोधक हटाने के लिए ट्रैक्टर इस्तेमाल किए। ये अवरोधक प्रदर्शनकारी किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए घग्गर नदी पुल पर हरियाणा पुलिस द्वारा बैरिकेड के हिस्से के रूप में रखे गए थे।

हरियाणा पुलिस ने कहा था कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों पर पथराव कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारी किसानों ने आंसू गैस के गोले फेंकने के लिए हरियाणा सरकार की आलोचना की और कहा कि वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के वास्ते दिल्ली की ओर मार्च करने के लिए दृढ़ हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने घोषणा की है कि किसान फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के वास्ते कानून बनाने सहित अपनी मांगों को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने के लिए मंगलवार को दिल्ली कूच करेंगे।

सोमवार को केंद्रीय मंत्रियों के साथ किसान प्रतिनिधियों की वार्ता विफल रही थी।

भाषा शफीक गोला

गोला