भुवनेश्वर, 22 जून (भाषा) ओडिशा राज्य महिला आयोग ने सोमवार को रायगड़ा जिले में दो एनजीओ कर्मचारियों पर भीड़ के हमले के दौरान छेड़छाड़ और निर्वस्त्र किए जाने के मामले में पीड़िता का बयान दर्ज किया, जबकि राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सात दिन में इस घटना के सिलसिले में की गई कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) पेश करने के लिए कहा।
मीडिया में खबरें आई हैं कि यह घटना “बच्चों को अगवा करने वालों” के बारे में झूठी अफवाहों के कारण हुई। इसपर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने प्राथमिकी और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत लगाई गई धाराओं, जांच और गिरफ्तारियों की स्थिति, अफवाहें फैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई और पीड़िता को दी गई चिकित्सा देखभाल, काउंसलिंग व पुनर्वास के बारे में जानकारी मांगी।
आयोग ने गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं (इंटर्न) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाए गए उपायों तथा सामुदायिक पुलिसिंग और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने (मॉब विजिलेंटिज्म) की घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर भी रिपोर्ट मांगी।
ओडिशा राज्य महिला आयोग ने बताया कि उन्होंने 22 वर्षीय महिला एनजीओ कर्मी से बात की, जिसके साथ कथित तौर पर 16 जून की रात कल्याणसिंहपुर थाना क्षेत्र में एक भीड़ ने छेड़छाड़ की गई थी और कपड़े उतार दिए गए थे।
भाषा पारुल जोहेब
जोहेब