Fasal Bima Last Date 2026: किसानों के हित में भाजपा सरकार का बड़ा फैसला, बढ़ गई फसल बीमा की आखिरी तारीख, जानिए कब तक कर सकेंगे अप्लाई

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Fasal Bima Last Date 2026: किसानों के हित में भाजपा सरकार का बड़ा फैसला, बढ़ गई फसल बीमा की आखिरी तारीख, जानिए कब तक कर सकेंगे अप्लाई

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  • Publish Date - July 31, 2026 / 10:28 AM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 10:30 AM IST

Fasal Bima Last Date 2026: किसानों के हित में भाजपा सरकार का बड़ा फैसला, बढ़ गई फसल बीमा की आखिरी तारीख, जानिए कब तक कर सकेंगे अप्लाई / Image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अंतिम तिथि 16 अगस्त 2026 कर दी गई
  • गैर-ऋणी किसानों के लिए एग्रीस्टैक आईडी अनिवार्य,
  • खरीफ खाद्यान्न, दलहन और तिलहन फसलों पर केवल 2% प्रीमियम

जयपुर: Fasal Bima Last Date 2026 प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ 2026 के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 16 अगस्त 2026 कर दी है। इससे अब हजारों ऐसे किसानों को अतिरिक्त समय मिलेगा जो किसी कारणवश 31 जुलाई तक अपनी फसलों का बीमा नहीं करा पाए थे। योजना के तहत ऋणी, गैर-ऋणी एवं बटाईदार किसान अपनी खरीफ फसलों का बीमा कराकर प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

Fasal Bima Last Date 2026 बढ़ गई फसल बीमा की आखिरी तारीख

Fasal Bima Last Date 2026 कृषि विभाग के आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों की आय को सुरक्षित बनाने, खेती में जोखिम कम करने तथा कृषि क्षेत्र को मजबूत आधार प्रदान करने की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। योजना के तहत किसानों को सूखा, अतिवृष्टि, बाढ़, ओलावृष्टि, चक्रवात, जलभराव सहित अन्य अधिसूचित प्राकृतिक जोखिमों से फसल क्षति होने पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

फसल बीमा के लिए 4 कंपनियों का चयन

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने योजना के सफल संचालन हेतु चार बीमा कंपनियों का चयन किया है, जो विभिन्न जिलों में किसानों को बीमा सुविधा उपलब्ध कराएंगी। किसान 16 अगस्त 2026 तक राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, निकटतम बैंक, सहकारी समिति, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) अथवा अन्य अधिकृत वित्तीय संस्थानों के माध्यम से अपनी खरीफ फसलों का बीमा करा सकते हैं।

किसानों के लिए एग्रीस्टैक आईडी अनिवार्य

आयुक्त ने बताया कि गैर-ऋणी किसानों के लिए एग्रीस्टैक आईडी अनिवार्य है। साथ ही योजना के तहत किसान 14 अगस्त 2026 तक अपनी बीमित फसल के नाम में आवश्यक संशोधन करवा सकते हैं। वहीं जो किसान योजना से बाहर होना चाहते हैं, वे 9 अगस्त 2026 तक संबंधित वित्तीय संस्था में घोषणा-पत्र प्रस्तुत कर योजना से बाहर होने का विकल्प चुन सकते हैं।

रियायती दरों पर फसल बीमा

उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत किसानों के लिए प्रीमियम दरें अत्यंत रियायती रखी गई हैं। खरीफ की खाद्यान्न, दलहन एवं तिलहन फसलों पर किसानों को केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा। रबी की खाद्यान्न, दलहन एवं तिलहन फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत तथा वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम निर्धारित किया गया है। शेष प्रीमियम राशि का वहन केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

आयुक्त ने किसानों से अपील की कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपनी खरीफ फसलों का बीमा अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केवल बीमा नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, उनकी आजीविका और भविष्य की सुरक्षा का मजबूत आर्थिक कवच है। प्राकृतिक आपदा या अन्य अधिसूचित जोखिमों से फसल को नुकसान होने की स्थिति में यही योजना किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर खेती को सुरक्षित, स्थायी और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 की नई अंतिम तिथि क्या है?

खरीफ 2026 के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 16 अगस्त 2026 कर दी गई है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ किन किसानों को मिलेगा?

इस योजना का लाभ ऋणी, गैर-ऋणी और बटाईदार किसान उठा सकते हैं। वे प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान होने पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

फसल बीमा के लिए आवेदन कहां किया जा सकता है?

किसान राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, बैंक, सहकारी समिति, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और अन्य अधिकृत वित्तीय संस्थानों के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

क्या गैर-ऋणी किसानों के लिए एग्रीस्टैक आईडी जरूरी है?

हां। कृषि विभाग के अनुसार गैर-ऋणी किसानों के लिए एग्रीस्टैक आईडी अनिवार्य कर दी गई है।

खरीफ फसलों के लिए किसानों को कितना प्रीमियम देना होगा?

खरीफ की खाद्यान्न, दलहन एवं तिलहन फसलों पर किसानों को केवल 2% प्रीमियम देना होगा। शेष प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार करेंगी।