तिरुवनंतपुरम, सात अप्रैल (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने मंगलवार को कहा कि विदेशी अंशदान विनियम अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन के प्रावधान वाला प्रस्तावित विधेयक ”खतरनाक” है और इसे केरल विधानसभा चुनाव के बीच में लाने का समय ”हास्यास्पद” लगता है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ईसाई समुदाय का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रस्तावित कानून केंद्र को किसी संगठन द्वारा विदेशी धन का उपयोग करके बनाई गई किसी भी चीज़ को उस स्थिति में जब्त करने की अनुमति देता है जब केंद्र सरकार अपने एफसीआरए लाइसेंस को नवीनीकृत नहीं करने या नवीनीकरण में देरी करने या यहां तक कि इसे रद्द करने का निर्णय लेती है।
थरूर ने कहा, ‘‘इसका मतलब यह है कि वे आपके गिरजाघरों, आपके स्कूलों, आपके अस्पतालों, आपके अनाथालयों पर कब्जा कर सकते हैं। अब यह पूरी तरह से नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन है।’’
उन्होंने कहा कि केंद्र किसी के विदेशी धन प्राप्त करने के अधिकार को विनियमित कर सकता है, लेकिन वह उन संपत्तियों को जब्त नहीं कर सकता जो उसकी अपनी नहीं हैं।
तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य थरूर ने कहा, ‘‘इसे कानून में ज़ब्ती कहा जाता है और यह पूरी तरह से अवैध है। इसलिए इस तरह का कानून पारित करके इसे कानूनी बनाना स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य है।’
उन्होंने कहा कि एफसीआरए के तहत लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होने का मतलब है कि भविष्य में वह इकाई या समूह विदेश से धन प्राप्त नहीं कर सकता है।
कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य ने कहा कि इस तरह के विधेयक के निहितार्थ ‘देश और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए वास्तव में गंभीर हैं।
थरूर ने यह भी कहा कि केरल में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट देने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि उनके सत्ता में आने की कोई संभावना नहीं है और ऐसे में उसके पक्ष में मतदान करना ‘वोटों की बर्बादी’ होगी।
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