आरटीआई अर्जी दायर करना नया धंधा बन गया है : न्यायालय; आरोपी को अग्रिम जमानत से इनकार

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आरटीआई अर्जी दायर करना नया धंधा बन गया है : न्यायालय; आरोपी को अग्रिम जमानत से इनकार

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  • Publish Date - June 15, 2026 / 06:20 PM IST,
    Updated On - June 15, 2026 / 06:20 PM IST

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सड़क निर्माण के कार्य में सरकारी कर्मचारी के कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालने के आरोपी आरटीआई कार्यकर्ता और अन्य लोगों को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए सोमवार को कहा कि सरकार से जानकारी मांगने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत अर्जी दायर करना एक नया धंधा बन गया है।

न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने आरटीआई कार्यकर्ता राकेश कुमार बहल और उनके सहयोगी की जमानत याचिका खारिज कर दी तथा सड़क निर्माण कार्य की निगरानी करने के उनके अधिकार पर सवाल उठाए।

न्यायमूर्ति मेहता ने कहा, ‘‘आरटीआई अर्जी दायर करना एक नया धंधा बन गया है। केंद्र सरकार ने निधि जारी कर दी है, यह सड़क निर्माण के कार्य की देखरेख करेगी। आपकी इसमें कोई भूमिका नहीं है। तथाकथित आरटीआई एक्टिविस्ट! याचिका खारिज की जाती है।’’

न्यायमूर्ति मेहता की राय से सहमति जताते हुए न्यायमूर्ति बिश्नोई ने कहा, ‘‘इन सभी सड़कों के निर्माण की निगरानी करने वाले आप कौन होते हैं? क्या आप कोई उच्च अधिकारी हैं…?’’

बहल ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है, क्योंकि उन्होंने सड़क निर्माण कार्य में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर किया था।

प्राथमिकी के अनुसार, बहल ने एक अन्य आरोपी राजीव कुमार उर्फ ​​मिंटू के साथ मिलकर पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला में जारी सड़क निर्माण कार्य में कथित तौर पर व्यवधान डाला और उस व्यक्ति को धमकाया, जिसकी देखरेख में यह काम हो रहा था। इसके अलावा, निर्माण स्थल पर मौजूद मजदूरों को भी धमकाया।

उन्होंने मजदूर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की और शिकायतकर्ता को चोट पहुंचाई। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम की संबद्ध धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 14 मई को अपने आदेश में कहा था कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों से सरकारी काम में बाधा डालने में उनकी विशिष्ट और सीधी भूमिका का पता चलता है, इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार किया जाता है।

भाषा सुभाष रंजन

रंजन