कानपुर, नौ जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में घनी आबादी वाले सीसामऊ इलाके में मंगलवार दोपहर संगीत टॉकीज के पास प्लास्टिक फर्नीचर और प्लाईवुड के एक गोदाम में भीषण आग लग गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में लपटों ने पूरे स्टॉक को अपनी चपेट में ले लिया। आग से उठा काला धुआं करीब दो किलोमीटर ऊंचाई तक दिखाई दिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। संकरी गलियों और भीड़भाड़ के कारण दमकलकर्मियों को आग बुझाने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
दमकल विभाग के अनुसार, आग दोपहर में गोदाम में लगी और तेजी से प्लास्टिक की कुर्सियों, फर्नीचर तथा प्लाईवुड के बड़े स्टॉक में फैल गई। व्यस्त बाजार क्षेत्र में हड़कंप मच गया और आसपास के दुकानदारों ने आग के फैलने की आशंका में अपना सामान बाहर निकालना शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, धुएं के कारण दृश्यता बेहद कम हो गई थी।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) दीपक शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही लाटूश रोड, कर्नलगंज, फजलगंज, मीरपुर छावनी और किदवई नगर फायर स्टेशनों से दमकल की नौ गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। संकरी गलियों को देखते हुए अतिरिक्त गाड़ियां भी स्टैंडबाय पर रखी गईं।
उन्होंने बताया कि पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से सबसे पहले आसपास की इमारतों को खाली कराया गया।
सीएफओ ने कहा, ‘‘संकरी गलियां, अत्यधिक गर्मी और गोदाम में रखे ज्वलनशील सामान के कारण हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। लपटें दूर से दिखाई दे रही थीं। हमारी प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित निकालना और आग को फैलने से रोकना थी।’’
करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। इसके बाद कई घंटों तक कूलिंग ऑपरेशन जारी रहा।
अधिकारियों के अनुसार, यह इमारत फैसल नामक व्यक्ति की है। पहली मंजिल पर प्लाईवुड का गोदाम था, जबकि ऊपरी मंजिल हाल ही में एक प्लास्टिक फर्नीचर व्यापारी को किराए पर दी गई थी।
स्थानीय लोगों का दावा है कि फर्नीचर वाले गोदाम में बिजली कनेक्शन नहीं था, जिसके चलते आशंका जताई जा रही है कि भीषण गर्मी या किसी बाहरी चिंगारी से आग लगी हो सकती है।
सीएफओ ने पुष्टि की कि घटना में किसी प्रकार की जनहानि या चोट की सूचना नहीं है। दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई से भीड़भाड़ वाले रिहायशी और व्यावसायिक इलाके में आग को फैलने से रोका जा सका। मामले की जांच जारी है।
भाषा
सं, आनन्द रवि कांत