कोलकाता, तीन जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम कोलकाता के महापौर पद से इस्तीफा देने के संबंध में ‘पुनर्विचार’ कर रहे हैं। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा उनके इस्तीफे के अनुरोध को स्वीकार कर लिये जाने संबंधी पार्टी के दावे के बावजूद पूर्व मंत्री ने अभी तक अपना इस्तीफा नहीं सौंपा है।
हकीम के महापौर पद पर बने रहने को लेकर अनिश्चितता उस समय पैदा हुई, जब टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने घोषणा की कि पार्टी प्रमुख ने उनके इस्तीफे को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, बाद में सामने आए घटनाक्रमों से पता चला कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई एक प्रशासनिक बैठक में महापौर की भागीदारी को लेकर पार्टी के भीतर आंतरिक तनाव बढ़ गया है।
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की अध्यक्ष माला रॉय ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्हें महापौर की ओर से अभी तक कोई इस्तीफा नहीं मिला है।
रॉय ने कहा, ‘मुझे अभी तक फिरहाद हकीम का इस्तीफा नहीं मिला है। नियमों के मुताबिक, अगर महापौर इस्तीफा देना चाहते हैं, तो उन्हें इसे मुझे सौंपना होगा।’
यह घटनाक्रम, पश्चिम बंगाल में टीएमसी के सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी के भीतर बढ़ती अनिश्चितता और भविष्य की रणनीति को लेकर आंतरिक मतभेद की खबरों के बीच हुआ है।
इससे पहले दिन में, घोष ने कहा था कि टीएमसी के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक और ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी हकीम ने एक बार फिर पार्टी प्रमुख से पद छोड़ने की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद वह इसके लिए तैयार हो गईं।
घोष ने संवाददाताओं से कहा, ‘उस समय (पहले) उनसे इस्तीफा न देने को कहा गया था। हालांकि, उन्होंने आज फिर से ममता बनर्जी से पद छोड़ने की अनुमति देने का अनुरोध किया, जिसके बाद वह मान गईं।’
हालांकि, टीएमसी सूत्रों ने बाद में संकेत दिया कि हकीम ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है और वह पुनर्विचार कर रहे हैं, विशेष रूप से राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में मुख्यमंत्री अधिकारी की अध्यक्षता में हुई प्रशासनिक बैठक में शामिल होने के बाद।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, हकीम के इस बैठक में शामिल होने से टीएमसी नेतृत्व के एक वर्ग के साथ उनका मतभेद हो गया। इस वर्ग ने भाजपा सरकार द्वारा बुलाई गई आधिकारिक बैठक में शामिल होने के राजनीतिक निहितार्थों पर सवाल उठाए हैं।
भाषा सुमित सुभाष
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