नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (भाषा) दिल्ली पुलिस ने भारत मंडपम में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में फरवरी में भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों के ‘शर्टसलेस’ विरोध प्रदर्शन को लेकर यहां एक अदालत में पांच हजार पन्नों का आरोप पत्र दायर किया और प्रदर्शन के पीछे कथित तौर पर एक महीने तक चली तैयारी का विस्तृत विवरण दिया गया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अपराध शाखा द्वारा दाखिल आरोपपत्र के अनुसार, भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब और पदाधिकारी मनीष शर्मा सहित 18 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जबकि इसमें लगभग 130 गवाहों को सूचीबद्ध किया गया है।
जांचकर्ताओं ने दावा किया है कि यह विरोध प्रदर्शन स्वतःस्फूर्त नहीं था, बल्कि 20 फरवरी को सम्मेलन में हुए प्रदर्शन से पहले कुछ हफ्तों तक मध्य और दक्षिण दिल्ली में हुई बैठकों की एक श्रृंखला का परिणाम था। ये बैठकें कथित तौर पर युवा कांग्रेस कार्यालय के साथ-साथ कनॉट प्लेस, सफदरजंग और अन्य क्षेत्रों के रेस्तरां में हुईं, जहां भूमिकाएं सौंपी गईं और रणनीति को अंतिम रूप दिया गया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि योजना के समन्वय के लिए एक सोशल मीडिया ग्रुप बनाया गया था, जिसमें प्रिंटेड टी-शर्ट की व्यवस्था करना और उच्च सुरक्षा वाले सम्मेलन परिसर के भीतर एक उपयुक्त स्थान की पहचान करना शामिल था।’’
उन्होंने बताया कि जांच से संकेत मिला है कि कार्यक्रम से पहले ओखला स्थित एक केंद्र पर ‘आपत्तिजनक छवियों’ वाली टी-शर्ट छपवाई गई थीं।
शुरुआती लामबंदी के प्रयासों के बावजूद, सम्मेलन में प्रदर्शन वाले दिन केवल कुछ ही प्रतिभागी इकट्ठा होने में सफल रहे। अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने भारत मंडपम में प्रवेश किया और आयोजन स्थल के भीतर विरोध प्रदर्शन करने का प्रयास किया।
आरोपपत्र में कहा गया है कि आरोपियों ने पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर विचार किया था, लेकिन व्यापक ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से अपना ध्यान अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन स्थल की ओर केंद्रित कर दिया। माना जाता है कि आरोपियों में से एक ने कहा कि ऐसे हॉल को निशाना बनाना चाहिए जो प्रदर्शनी वाले इलाकों के पास हो, जहां दुनिया भर से प्रतिनिधि आए हों, ताकि घटना ज़्यादा लोगों तक पहुंचे और ज्यादा ध्यान आकर्षित हो।
पुलिस ने कुछ आरोपियों को प्रमुख समन्वयक बताया है, जिन्होंने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों की लामबंदी, सामग्री की तैयारी और जमीनी क्रियान्वयन की देखरेख की। आरोप पत्र में कहा गया है कि एक व्यक्ति को विशेष रूप से विरोध प्रदर्शन के लिए प्रदर्शनकारियों को अंतिम रूप देने का काम सौंपा गया था।
यह मामला ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान कथित व्यवधान के प्रयासों से संबंधित है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के अग्रणी लोगों ने भाग लिया था। इस मामले में आगे की कार्यवाही शहर की एक अदालत में चल रही है।
युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता 20 फरवरी को एआई सम्मेलन के कार्यक्रम स्थल में घुस गए। वहां उन्होंने अचानक विरोध प्रदर्शन किया, अपनी शर्ट उतारकर अंदर पहनी टी-शर्ट दिखाई, जिन पर सरकार और भारत-अमेरिका के अस्थायी व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लिखे थे। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें तुरंत वहां से हटा दिया।
टी-शर्ट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें छपी थीं, जिन पर ‘पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ (प्रधानमंत्री ने समझौता कर लिया है) जैसे नारे लिखे थे और ‘भारत-अमेरिका व्यापार सौदे’ तथा ‘एपस्टीन फाइल्स’ का विरोध किया गया था।
प्रदर्शनकारियों की आयोजन स्थल पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और पुलिस कर्मियों के साथ हाथापाई भी हुई।
इस घटना ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया, जिसमें भाजपा ने इसे ‘वैश्विक मंच पर भारत की छवि को धूमिल करने वाला शर्मनाक कृत्य’ करार दिया, जबकि युवा कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय हितों की रक्षा के उद्देश्य से किया गया ‘शांतिपूर्ण’ प्रदर्शन बताकर अपना बचाव किया।
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