ओडिशा में भारी बारिश के बाद बाढ़ का खतरा, 10,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

ओडिशा में भारी बारिश के बाद बाढ़ का खतरा, 10,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

ओडिशा में भारी बारिश के बाद बाढ़ का खतरा, 10,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
Modified Date: September 25, 2026 / 03:48 pm IST
Published Date: September 25, 2026 3:48 pm IST

भुवनेश्वर, 25 सितंबर (भाषा) ओडिशा में गहरे दबाव के कारण शुक्रवार को भारी बारिश हुई जिसके तहत कम से कम 24 स्थानों पर 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई।

भारी बारिश के कारण नदियों के उफनाने, भूस्खलन और जलभराव के कारण अधिकारियों को स्कूल बंद करने को विवश होना पड़ा।

तटीय राज्य के दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में निचले इलाकों तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के करीब 10,000 लोगों को 200 राहत केंद्रों में स्थानांतरित किया गया है।

एक दिन पहले आंध्र प्रदेश के तट से टकराया गहरे दबाव का क्षेत्र ओडिशा में प्रवेश कर गया जिसके कारण शुक्रवार सुबह 8.30 बजे तक 24 घंटे में राज्य के कई हिस्सों में बहुत भारी बारिश हुई। नबरंगपुर जिले का तेंतुलीखुंटी 395 मिलीमीटर बारिश के साथ सबसे अधिक प्रभावित रहा। इसके बाद नंदाहांडी में 344 मिलीमीटर और कोरापुट जिले के बोरीगुमा में 307.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

एक अधिकारी ने बताया कि इस आपदा से दक्षिणी ओडिशा के छह जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और भुवनेश्वर समेत पश्चिमी तथा तटीय क्षेत्रों में भी जनजीवन प्रभावित हुआ है।

उन्होंने कहा कि बालासोर जिले में जलाका और बुधबलंगा नदियों तथा जाजपुर जिले में बैतरणी और कानी नदियों का जलस्तर पहले ही खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिससे एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।

मानसून के मौसम की शुरुआत से ही राज्य में पहले ही दो बार बाढ़ आ चुकी है।

अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने करीब 10,000 लोगों को 200 राहत केंद्रों में स्थानांतरित किया है, जबकि ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएफ) की 33 बचाव टीमों और अग्निशमन सेवा के 300 से अधिक दलों को पेड़ों के उखड़ने और भूस्खलन के कारण बाधित सड़कों को साफ करने के काम में लगाया गया है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, गहरा दबाव कमजोर होकर दबाव में बदल गया है और इसका केंद्र ओडिशा के दक्षिणी आंतरिक हिस्से तथा उससे सटे छत्तीसगढ़ के ऊपर है।

यह ओडिशा के नुआपाड़ा जिले में सक्रिय था और तितलागढ़ से करीब 90 किलोमीटर, भवानीपटना से 100 किलोमीटर, छत्तीसगढ़ के कांकेर से 110 किलोमीटर और रायपुर से 120 किलोमीटर दूर था।

दबाव, चक्रवाती तूफान से कम तीव्रता वाली और कम दबाव वाले क्षेत्र से अधिक प्रभाव वाली मौसम प्रणाली होती है।

कंधमाल जिले में कलिंग घाट पर भूस्खलन के कारण करीब 200 मीटर लंबी सुरक्षा दीवार ढह गई। खल्लिकोट के बड़ा घाटी में चट्टानें राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर गिरने से यातायात बाधित हो गया।

गजपति जिले के मोहना के कई घाटों और मलकानगिरी के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन के कारण सड़कें अवरुद्ध हो गईं। रायगड़ा में कई स्थानों पर पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए, जबकि रेलवे पटरियों पर भूस्खलन के कारण रायगड़ा मंडल में ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं।

राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार को प्रभावित क्षेत्रों से सड़क संपर्क बाधित होने की भी सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि ब्रह्मपुर शहर के कई हिस्से अभी भी जलमग्न हैं।

भाषा तान्या पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में