नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने दिल्ली की एक अदालत को सूचित किया है कि अमेरिका के एक नागरिक और यूक्रेन के छह नागरिकों की एक व्यापक आतंकी साजिश के संबंध में जांच की जा रही है। इस साजिश में भारत और म्यांमा के जातीय विद्रोही समूहों से संदिग्ध संबंध और उन्हें ड्रोन प्रशिक्षण देने के आरोप शामिल हैं।
ये दलीलें एनआईए के विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष पेश की गईं, जिन्होंने 27 मार्च को कार्यवाही में संघीय आतंकवाद विरोधी एजेंसी को अपनी हिरासत में मौजूद विदेशियों से 10 और दिन तक पूछताछ करने की अनुमति दी।
उन्हें छह अप्रैल को फिर से अदालत के सामने पेश किया जाएगा। अदालत ने कहा, ‘‘उन्होंने (एनआईए के वकील ने) यह दलील दी है कि मामले के इस चरण में, आरोपियों के भारत में जातीय विद्रोही समूहों से जुड़े होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। आरोपियों द्वारा पड़ोसी देशों की यात्रा करना भी एक ऐसा पहलू है जिस पर इस अदालत को विचार करना होगा।’’
एजेंसी ने दावा किया कि आरोपी कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दंडनीय अपराधों को अंजाम देने में शामिल थे।
एनआईए ने अदालत को बताया कि जांच में सीमा पार फैली एक साजिश में विदेशी नागरिकों की संलिप्तता से संबंधित ‘‘विभिन्न नए तथ्य’’ सामने आए हैं। एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने म्यांमा में प्रवेश करने के लिए मिजोरम के रास्ते यात्रा की थी, इस पहलू की वर्तमान में गहन जांच की जा रही है।
एजेंसी ने अदालत को सूचित किया कि उसकी टीम जांच के तहत दिल्ली के अलावा कई अन्य राज्यों का दौरा कर चुकी हैं। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया कि यूक्रेन के नागरिकों से पूछताछ एक रूसी दुभाषिए के माध्यम से की जा रही, क्योंकि पांच आरोपियों ने कहा था कि वे रूसी भाषा अच्छी तरह से जानते हैं।
बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि आरोपियों से कोई ड्रोन बरामद नहीं हुआ है। वकील ने अदालत को बताया, ‘‘इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आरोपियों ने किसी को ड्रोन के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया था…।’’
हालांकि, अदालत ने कहा कि वह एनआईए से इस बात पर सहमत है कि कई ऐसे सवाल हैं जिनकी जांच की जानी आवश्यक है।
सोलह मार्च को दायर हिरासत अर्जी में, जांच अधिकारी ने प्राथमिकी का हवाला देते हुए कहा कि यूक्रेन के कुछ नागरिक अलग-अलग तारीखों पर पर्यटक वीजा पर भारत में दाखिल हुए और गुवाहाटी के लिए उड़ान भरी, जहां से वे प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट या संरक्षित क्षेत्र परमिट जैसे आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए बिना मिजोरम चले गए। इसके बाद, इन व्यक्तियों ने म्यांमा में जातीय सशस्त्र संगठनों (ईएओ) को पूर्व-निर्धारित प्रशिक्षण देने के लिए अवैध रूप से प्रवेश किया।
भाषा आशीष पवनेश
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