बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव तृणमूल कार्यालय में फंदे से लटका मिला

Ads

बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव तृणमूल कार्यालय में फंदे से लटका मिला

  •  
  • Publish Date - August 16, 2026 / 01:40 PM IST,
    Updated On - August 16, 2026 / 01:40 PM IST

रामपुरहाट, 16 अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यालय में रविवार सुबह फंदे से लटका मिला। पुलिस ने यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि रामपुरहाट के हट्टाला पाड़ा इलाके में बनर्जी के आवास के पास स्थित पार्टी कार्यालय से एक कथित ‘सुसाइड नोट’ भी बरामद हुआ है।

आशीष बनर्जी 74 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी और एक बेटा है।

सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित कथित ‘सुसाइड नोट’ में बनर्जी ने कहा है कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने राजनीति में आने पर अफसोस भी जताया।

समाचार एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ इस पत्र की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी है।

पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया।

अधिकारियों ने कहा कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि बनर्जी की मौत किन परिस्थितियों में हुई। उन्होंने कहा कि कथित ‘सुसाइड नोट’ में लिखी बातों और घटना से जुड़ी अन्य परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी ने 2001 से 2026 तक राज्य विधानसभा में रामपुरहाट निर्वाचन क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व किया था। वह विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्व सरकार में स्कूली शिक्षा तथा कृषि समेत विभिन्न विभागों के मंत्री भी रहे।

बनर्जी ने एक पृष्ठ के कथित ‘सुसाइड नोट’ में कहा कि वह कभी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे और उन्होंने किसी काम के बदले कभी पैसे नहीं लिए। उन्होंने इसमें यह भी लिखा कि वह पार्टी के भीतर होने वाले ‘‘गलत कार्यों’’ को हमेशा स्वीकार नहीं कर पाते थे, लेकिन उनका विरोध भी नहीं कर सके।

कथित ‘सुसाइड नोट’ में तारापीठ-रामपुरहाट विकास प्राधिकरण (टीआरडीए) का भी उल्लेख किया गया है। बनर्जी ने इसमें दावा किया कि प्राधिकरण की निविदाओं से जुड़े फैसलों, चेक जारी करने, योजनाओं को मंजूरी देने या अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें ‘‘बदनाम’’ और अपमानित करने की कोशिश की गई तथा उन्हें लगता है कि राजनीति में आना उनकी भूल था।

छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़े रहे आशीष बनर्जी ने शिक्षक के रूप में भी काम किया था। उन्होंने कथित सुसाइड नोट में अपने परिवार के सदस्यों को राजनीति में नहीं आने की सलाह दी और विद्यार्थियों से मिले स्नेह को याद किया।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने उनकी मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कथित नोट में लिखी बातों से पूर्व विधायक को ‘‘बदनाम करने के लिए चलाए गए अभियान को लेकर गंभीर और चिंताजनक सवाल’’ उठते हैं।

अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जीवनभर शिक्षक और जनसेवक रहे आशीष दा ने दशकों तक ईमानदारी, गरिमा और सादगी के साथ लोगों की सेवा की।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) और मीडिया के एक वर्ग को ऐसी राजनीति के परिणामों पर विचार करना चाहिए, जिसमें आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है और सच्चाई सामने आने से पहले ही लोगों की प्रतिष्ठा को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है।

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने ‘‘निष्पक्ष जांच’’ की मांग करते हुए कहा कि अभी इस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगा कि आशीष बनर्जी ने आत्महत्या की है।

घोष ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक पर राजनीतिक दबाव था। उन्होंने एक वीडियो का भी उल्लेख किया, जिसमें भाजपा का एक नेता सड़क पर आशीष बनर्जी का कथित रूप से अपमान करता दिखाई दे रहा है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा की ओर रुख कर चुके तृणमूल कांग्रेस के कुछ पूर्व नेताओं ने आशीष बनर्जी पर अपने साथ आने का दबाव बनाया था।

इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय भाजपा विधायक ध्रुव साहा ने आशीष बनर्जी की मौत पर दुख जताया और मामले की उचित जांच की मांग की।

साहा ने कहा, ‘‘रामपुरहाट से जीतने के बाद मैं उनका आशीर्वाद लेने उनके आवास पर गया था। रामपुरहाट और बीरभूम के लोग सच्चाई जानना चाहते हैं। हम उनकी मौत की उचित जांच चाहते हैं।’’

आशीष बनर्जी ने 2026 का विधानसभा चुनाव रामपुरहाट सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था लेकिन वह साहा से 24,000 से अधिक मतों के अंतर से हार गए थे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि चुनाव में हार के बाद आशीष बनर्जी राजनीति में खास सक्रिय नहीं थे।

आशीष बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन के दौरान बीरभूम में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के केंद्र में भी रहे। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनुब्रत मंडल के पार्टी का जिलाध्यक्ष रहने के दौरान वह जिले में पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे।

तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन के बाद इस वर्ष विधानसभा चुनाव में उसकी हार हुई और भाजपा ने राज्य में सरकार बनाई। राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व नेताओं और विधायकों को भ्रष्टाचार से संबंधित जांच और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा है।

पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आशीष बनर्जी ने क्या आत्महत्या की और यदि ऐसा है तो उन्हें यह कदम किस वजह से उठाना पड़ा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा कथित ‘सुसाइड नोट’ की सामग्री से उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में और जानकारी मिलने की संभावना है।

भाषा

सिम्मी नेत्रपाल

नेत्रपाल