स्मृति ईरानी से राम माधव तक- कई दिग्गज नेताओं की भाजपा की नयी टीम में वापसी

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स्मृति ईरानी से राम माधव तक- कई दिग्गज नेताओं की भाजपा की नयी टीम में वापसी

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 08:28 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 08:28 PM IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नयी राष्ट्रीय टीम में सोमवार को कई ऐसे नेताओं की अहम भूमिका में वापसी हुई जो या तो पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक ढांचे से बाहर हो गए थे या जिनका राजनीतिक कद कम हो गया था। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता राम माधव से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब और तीरथ सिंह रावत तक शामिल हैं।

कभी मोदी सरकार के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहीं ईरानी को भाजपा में संगठन के सबसे अहम पदों में से एक, राष्ट्रीय महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया है।

ईरानी, ​​जिन्होंने 2019 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनके पारिवारिक गढ़ अमेठी में हराया था, पांच साल बाद (2024 के लोकसभा चुनाव में) वह वहीं से कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा से 1.67 लाख से अधिक मतों के अंतर से हार गईं।

इस हार का मतलब केंद्र सरकार से उनका बाहर होना भी था। वह एक दशक तक मंत्रिपरिषद में रहीं और इस दौरान उन्होंने मानव संसाधन विकास, कपड़ा, सूचना और प्रसारण तथा महिला एवं बाल विकास जैसे मंत्रालयों की बागडोर संभाली।

अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले, महासचिव के तौर पर उनकी नियुक्ति ने पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक ढांचे में उनकी जोरदार वापसी कराई है।

एक और उल्लेखनीय वापसी संघ के विचारक राम माधव की है जिन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है।

संघ के पूर्व प्रवक्ता माधव, जिन्हें 2014 में भाजपा में भेजा गया था, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान पार्टी के सबसे प्रभावशाली महासचिवों में से एक के तौर पर उभरे थे।

उन्होंने पूर्वोत्तर में भाजपा के विस्तार में अहम भूमिका निभाई और वह 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद जम्मू कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के साथ गठबंधन कराने में मुख्य भूमिका निभाने वालों में से एक थे।

वर्ष 2018 में भाजपा-पीडीपी सरकार गिरने के बाद उनका प्रभाव कम हो गया और सितंबर 2020 में जब तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने अपनी टीम बनाई, तो उन्हें राष्ट्रीय महासचिव के पद से हटा दिया गया। इसके बाद वह भाजपा के संगठनात्मक मोर्चे से लगभग गायब ही हो गए थे।

भाजपा ने उन्हें 2024 में केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान की निगरानी के लिए वापस बुलाया था।

त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को भी राष्ट्रीय महासचिव के पद पर पदोन्नत किया गया है।

देब ने 2018 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी और 25 साल से जारी वाम शासन को खत्म किया था। लेकिन मई 2022 में अचानक उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कहा गया और उनकी जगह माणिक साहा को दी गई।

भाजपा ने इस बदलाव की कोई विस्तृत वजह कभी सार्वजनिक रूप से नहीं बताई।

हालांकि, नयी टीम के कुछ अन्य लोगों के उलट, देब अधिक समय तक हाशिये पर नहीं रहे। कुछ ही महीनों में, पार्टी ने उन्हें हरियाणा का प्रभारी बना दिया और राज्यसभा भेज दिया। इसके बाद, उन्होंने 2024 में त्रिपुरा पश्चिम लोकसभा सीट जीती और चुनाव सह-प्रभारी के तौर पर पार्टी का इतिहास रचने में अहम भूमिका निभाई।

राष्ट्रीय संगठन में शामिल होने वाले एक और पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत हैं, जिन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर रावत का कार्यकाल राज्य के इतिहास में सबसे छोटे कार्यकाल में से एक था। मार्च 2021 में जब उन्होंने अचानक त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह ली थी, वह लोकसभा सदस्य थे। हालांकि, चार महीने से भी कम समय बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।

आधिकारिक तौर पर, उनके पद से हटने की वजह संवैधानिक जरूरत बताई गई थी, जिसके तहत उन्हें छह महीने के भीतर राज्य विधानसभा का सदस्य बनना था लेकिन कोविड महामारी के दौरान उपचुनाव कराने को लेकर अनिश्चितता थी। उस समय, उन्हें कई विवादित बयान देने को लेकर काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके बाद, रावत राष्ट्रीय राजनीति के पर्दे से ओझल हो गए।

भाजपा की राजस्थान इकाई के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया की राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर नियुक्ति भी इसी तरह की उनकी राजनीतिक वापसी को दर्शाती है।

प्रभावशाली जाट समुदाय से आने वाले ओबीसी नेता पूनिया ने 2019 से 2023 के बीच प्रदेश भाजपा की कमान संभाली थी।

वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया था और फिर वह चुनावों में अपनी आमेर सीट हार गए। उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उम्मीदवार नहीं बनाया गया।

हालांकि, बाद में पार्टी ने उन्हें हरियाणा प्रभारी बनाया। 2024 में हरियाणा में लगातार तीसरी बार भाजपा की जीत ने पूनिया की साख को और मजबूत किया। इसके बाद वह राज्यसभा पहुंचे और सोमवार को उन्हें पार्टी में नयी जिम्मेदारी मिली।

भाजपा की आईटी टीम में हुए बदलावों के साथ ही दो ऐसे लोग भी वापस आए हैं, जो कभी पार्टी के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ में अहम पद पर थे। इनमें प्रीति गांधी और हरियाणा के नेता अरुण यादव शामिल हैं।

यादव 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी बनाये गए थे। इस चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणियों को गलत साबित करते हुए सत्ता को बरकरार रखा।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश