कुंभ मेले के दौरान चर्चा में रही लड़की को मप्र पुलिस को न सौंपा जाए: अदालत
कुंभ मेले के दौरान चर्चा में रही लड़की को मप्र पुलिस को न सौंपा जाए: अदालत
कोच्चि, 29 जुलाई (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और पुलिस को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान चर्चा में आई लड़की को अदालत के आदेश के बिना मध्य प्रदेश पुलिस या किसी अन्य को न सौंपा जाए।
यह निर्देश न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने तब जारी किया जब अदालत को बताया गया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने केरल के राज्य पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया है कि वे लड़की को तुरंत मध्य प्रदेश पुलिस को सौंप दें।
उच्च न्यायालय ने कहा कि आयोग न तो कोई अदालत है, न ही कोई अधिकरण या फैसला करने वाली संस्था है और प्रथम दृष्टया उसके पास केवल सिफारिश करने की शक्तियां हैं।
इसलिए, आयोग किसी व्यक्ति के जीवन के अधिकार से जुड़े कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता है।
अदालत का यह भी मानना था कि आयोग का आदेश बताता है कि लड़की को अपनी जान का जो खतरा महसूस हो रहा था, वह ‘असली और तुरंत घटित होने वाला’ था।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘आयोग का यह आदेश देने का अधिकार क्षेत्र संदिग्ध है कि याचिकाकर्ता (लड़की) को केरल से मध्य प्रदेश ले जाया जाए। यह बात तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब यह अदालत याचिकाकर्ता के उस दावे पर विचार कर रही है कि कई लोग उसके जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए, इस अदालत का मानना है कि याचिकाकर्ता को अपनी जान का जो खतरा महसूस हो रहा है, वह असली और तुरंत होने वाला है।’’
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पुलिस (जिसमें कोच्चि शहर के पुलिस आयुक्त भी शामिल हैं जिनके अधिकार क्षेत्र में लड़की रहती है) को आदेश दे कि जब तक उसकी जान की सुरक्षा की याचिका का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक उसे उच्च न्यायालय के आदेश के बिना और उसकी मर्जी के खिलाफ वहां से न हटाया जाए।
अदालत ने कहा, ‘‘प्रतिवादी (राज्य और पुलिस) यह सुनिश्चित करेंगे कि याचिकाकर्ता को उचित सुरक्षा दी जाए और इस अदालत के आदेश के बिना उसे किसी भी व्यक्ति (मध्य प्रदेश की पुलिस सहित) को न सौंपा जाए।’’
अदालत ने कहा कि जब भी वह लड़की (जो छिप गई है) या उसका अधिकृत प्रतिनिधि उसकी सुरक्षा के लिए नियुक्त महिला सुरक्षा अधिकारी से संपर्क करता है तो प्रतिवादी ‘यह सुनिश्चित करेंगे कि याचिकाकर्ता को उसकी जान के लिए पर्याप्त और प्रभावी पुलिस सुरक्षा दी जाए’ और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उसे कोच्चि के न्यायिक क्षेत्र से न हटाया जाए।’’
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए चार अगस्त की तारीख तय की।
आयोग का यह आदेश उत्तर प्रदेश के एक सोशल वर्कर की याचिका पर आया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि लड़की नाबालिग है और उसने अलग धर्म के व्यक्ति से शादी की है।
लड़की के पति (फरमान) पर उसे अगवा करने का आरोप है। यह मामला मध्य प्रदेश पुलिस ने लड़की के पिता की शिकायत पर दर्ज किया था, जिन्होंने दावा किया है कि वह नाबालिग है।
प्यारी मुस्कान और खूबसूरत आंखों वाली इंदौर की यह लड़की तब चर्चा में आई थी, जब पिछले साल प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के कुंभ मेले में उसे रुद्राक्ष की माला बेचते हुए दिखाने वाला एक वीडियो साझा किया गया था। इसके बाद इस लड़की की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।
लड़की ने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में फरमान से शादी की थी।
हालांकि, बाद में उनके परिवार ने दावा किया कि वह नाबालिग थी, जिसके चलते मध्य प्रदेश पुलिस ने फरमान पर अपहरण समेत कई अपराधों के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दर्ज किया गया।
भाषा संतोष नरेश
नरेश

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