सरकारी लापरवाही से गई लोगों की जान, सरकार की जवाबदेही बनती है : प्रियंका

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सरकारी लापरवाही से गई लोगों की जान, सरकार की जवाबदेही बनती है : प्रियंका

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  • Publish Date - May 25, 2021 / 10:20 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:31 PM IST

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर में हजारों लोगों की मौत के लिए केंद्र सरकार की ‘लापरवाही’ को जिम्मेदार ठहराते हुए मंगलवार को कहा कि इसके लिए सरकार की जवाबदेही बनती है।

उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में यह भी बताया कि आने वाले कुछ दिनों तक वह ‘‘जिम्मेदार कौन ?’’ शीर्षक की एक श्रृंखला के तहत जनता की तरफ से केंद्र से सवाल पूछेंगी और लोगों के सामने कुछ तथ्य भी रखेंगी।

प्रियंका ने कहा, ‘‘ जब देश के नागरिक बेड, ऑक्सीजन, टीके और दवाइयों के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय देश की सरकार से लोगों को उम्मीद थी कि वह इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए, पहले की तैयारियों एवं देश में उपलब्ध संसाधनों का पूरा इस्तेमाल लोगों की जान बचाने में करेगी। लेकिन सरकार पूरी तरह से मूकदर्शक मोड में चली गई और पीड़ादायी स्थिति पैदा हुई।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘केंद्र सरकार के पास तैयारी के नाम पर केवल लापरवाही की तस्वीर थी। टीकों का निर्यात करना, ऑक्सीजन के निर्यात को 2020 में दुगुना कर देना, दूसरे देशों की तुलना में जनसंख्या के अनुपात से बहुत कम टीके का बहुत देर से ऑर्डर देना आदि कई बिंदु हैं, जिन पर सरकार का व्यवहार एकदम गैर-ज़िम्मेदाराना रहा।’’

कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी के अनुसार, ‘‘आज जब यह लहर थोड़ी थम रही है तब अचानक सरकार अपनी मीडिया और मशीनरी के माध्यम से फिर से दिखाई देने लगी है, फिर से हमारे प्रधानमंत्री और उनके मंत्री आगे आकर बयान देने लगे हैं। ’’

उन्होंने सवाल किया, ‘‘हम यहां पहुंचे कैसे? दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पदक में से एक, ऑक्सीजन उत्पादक में से एक, जिस देश के डॉक्टर विश्व भर में मशहूर हैं…. आज हम इस मुक़ाम पर कैसे पहुंच गए कि ऑक्सीजन, बेड, वैक्सीन, दवाओं की कमी से हमारे देशवासी अपनी जान दे रहे हैं? ’’

प्रियंका ने कहा, ‘‘हर एक भारतीय नागरिक की जान कीमती है। सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है। जिन लोगों ने अपने परिजन खोए हैं, सरकार उनके प्रति जवाबदेह है। अनगिनत जानें सरकार की लापरवाही के चलते गईं। इसलिए सवाल पूछे जाने जरूरी हैं। ’’

भाषा हक हक मनीषा

मनीषा