गंगटोक, 20 जून (भाषा) सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने शनिवार को नाथू ला दर्रे से इस साल की कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिये तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया।
इस जत्थे में 44 तीर्थयात्री हैं, जिनमें चार संपर्क अधिकारी और एक चिकित्सा अधिकारी भी हैं। यह जत्था सिक्किम में चार दिन के अनुकूलन कार्यक्रम के बाद तिब्बत में दाखिल हुआ।
जत्थे ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में ग्यांग्ज़े की ओर अपना सफर शुरू किया। ग्यांग्जे पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के रास्ते का एक अहम पड़ाव है। जत्थे में भारत के विभिन्न राज्यों के 32 पुरुष और 12 महिलाएं हैं।
राज्य के पर्यटन मंत्री शेरिंग थेंडुप भूटिया, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सिक्किम पर्यटन विकास निगम के कर्मचारियों की मौजूदगी में माथुर ने नाथू ला से तीर्थयात्रियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस मौके को बेहद भावुक क्षण बताते हुए माथुर ने कहा कि हिमालयी दर्रे से होकर पवित्र यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को विदा करते हुए वह ‘अभिभूत’ हैं।
उन्होंने यात्रा को संभव बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया और यात्रा का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, सिक्किम सरकार एवं आईटीबीपी के प्रयासों की सराहना की।
राज्यपाल ने स्मरण किया कि पिछले साल उनके कार्यकाल के दौरान नाथू ला के रास्ते यह तीर्थयात्रा फिर से शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को एक बार फिर हरी झंडी दिखाकर रवाना करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
उन्होंने तीर्थयात्रा को सुगम बनाने में सहयोग के लिए चीनी अधिकारियों का भी धन्यवाद किया और लाखों हिंदू श्रद्धालुओं के लिए कैलाश मानसरोवर के महत्व का ज़िक्र किया।
नाथू ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा भारत की सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक यात्राओं में से एक है।
भाषा राजकुमार दिलीप
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