नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) कांग्रेस सांसद सप्तगिरि उलाका ने देश से वामपंथी उग्रवाद खत्म करने के लिए निर्धारित समयसीमा को जुमला करार देते हुए सोमवार को लोकसभा में दावा किया भाजपा सरकार नक्सलवाद खत्म नहीं कर रही, बल्कि खनन गतिविधियों के लिए अपने ‘‘आका’’ को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ दे रही है।
उलाका ने वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के प्रयास पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि नक्सलवाद एक विचारधारा है, जिसे केवल बल से नहीं खत्म किया जा सकता, बल्कि विकास कर इस समस्या का समाधान होगा। उन्होंने कहा कि यह जमीन के लिए लड़ाई नहीं, बल्कि विश्वास की लड़ाई है।
उन्होंने 31 मार्च 2026 तक तक देश को नक्सल मुक्त बनाने के भाजपा सरकार के संकल्प को जुमला करार देते हुए कहा कि यह सरकार समयसीमा निर्धारित करती है कि नक्सलवाद एक साल में खत्म हो जाएगा, दो साल में खत्म हो जाएगा।
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘मुझे तो लगता है कि कहीं से आदेश मिला है कि खनन (पट्टा) 31 मार्च तक दे दो, बैलाडीला (छत्तीसगढ़) और नियामगिरि (ओडिशा) जैसी जगहों पर, जहां आदिवासी रहते हैं। आप नक्सलवाद खत्म नहीं कर रहे हो, बल्कि खनन शुरू करने के लिए अपने आका को ग्रीन कॉरिडोर दे रहे हो।’’
उन्होंने सवाल किया कि हिंदी पट्टी (मध्य भारत) में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन जब पूर्वोत्तर की बात आती है तो वहां कई सारे संघर्ष विराम समझौते क्यों होते हैं?
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर में उग्रवाद के खिलाफ अभियान को निलंबित क्यों किया जाता है? सरकार सशस्त्र समूहों के साथ वार्ता करती है। ऐसे 20-225 समूह हैं, जिनसे आप बातचीत करते हो। यह दोहरी नीति क्यों?’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंदीभाषी आदिवासियों को आप बंदूक से उड़ा रहे हो। मैं नहीं कह रहा कि हम वार्ता के खिलाफ हैं। हम चर्चा के लिए तैयार हैं। जब आप पूर्वोत्तर में स्वायत्ता, संस्कृति और अधिकारों के बारे में बात करते हो, तो आप मध्य भारत में यही चीज क्यों नहीं करते?’’
उन्होंने छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला स्थित झीरम घाटी में 2013 में हुए नक्सली हमले में कांग्रेस के कई नेताओं की जान जाने का उल्लेख करते हुए सवाल किया, ‘‘देश की आजादी की लड़ाई में क्या कोई भाजपा नेता मारा गया? क्या किसी नक्सली हमले में भाजपा का कोई नेता मारा गया?’’
उन्होंने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार द्वारा नक्सलवाद की समस्या के समाधान के लिए उठाये गए कई कदमों और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शुरू की गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
भाषा सुभाष हक
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