नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की 14,535 करोड़ रुपये की सफल बोली को मंजूरी देने वाले एनसीएलटी के आदेश पर रोक लगाने की अपील करते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।
शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वेदांता ने 25 मार्च को अपनी अपील दायर की। इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने अदाणी की समाधान योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
इस बीच, अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने भी शीर्ष न्यायालय में एक ‘कैविएट’ दायर की है। कैविएट एक कानूनी नोटिस है जिसमें अदालत से अनुरोध किया जाता है कि दूसरे पक्ष की याचिका पर कोई भी आदेश देने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।
अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने 24 मार्च को वेदांता की उस याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया था, जिसमें राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश को चुनौती दी गई थी।
हालांकि, एनसीएलएटी ने जेएएल के ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख तय की है।
वेदांता समूह ने दलील दी है कि उसने जेएएल के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई थी। वेदांता की बोली 16,726 करोड़ रुपये की थी, जबकि अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली 14,535 करोड़ रुपये थी।
वेदांता का तर्क है कि दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त संपत्ति का अधिकतम मूल्य प्राप्त करना है, लेकिन ऋणदाताओं ने कम मूल्य वाली बोली को चुना।
दूसरी ओर, ऋणदाताओं की समिति(सीओसी) ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी बोलीदाता द्वारा केवल सबसे ऊंची बोली लगाना उसके लिए जीत की गारंटी नहीं होता।
ऋणदाताओं के अनुसार, अदाणी की योजना को इसलिए प्राथमिकता दी गई क्योंकि उन्होंने लगभग 6,000 करोड़ रुपये का तत्काल नकद भुगतान और दो साल के भीतर पूरा भुगतान करने की पेशकश की थी। इसके विपरीत, वेदांता का भुगतान पांच साल की लंबी अवधि में फैला हुआ था।
जून, 2024 में जेपी एसोसिएट्स (जेएएल) को 57,185 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान में चूक के बाद दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में शामिल किया गया था।
भाषा सुमित अजय
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