सोयाबीन रिफाइंड से सरसों हुआ सस्ता, अधिकांश तेल-तिलहन में सुधार

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सोयाबीन रिफाइंड से सरसों हुआ सस्ता, अधिकांश तेल-तिलहन में सुधार

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  • Publish Date - March 30, 2026 / 07:49 PM IST,
    Updated On - March 30, 2026 / 07:49 PM IST

नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) आवक कम रहने, मांग बढ़ने और सोयाबीन रिफाइंड से सस्ता होने की वजह से देश के तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को विशेष रूप से सरसों तेल-तिलहन की अगुवाई में अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम में सुधार देखने को मिला। जबकि वार्षिक लेखाबंदी के बीच सुस्त कामकाज और महंगे दाम पर कमजोर लिवाली के कारण मूंगफली तेल-तिलहन और सोयाबीन तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

मलेशिया एक्सचेंज दोपहर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा तेज बंद हुआ। जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में लगभग दो प्रतिशत की मजबूती है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि 31 मार्च के नजदीक आने के कारण कारोबारी लेखाबंदी के काम में जुटे हैं जिससे कारोबारी गतिविधियों में अपेक्षाकृम सुस्ती है। लेकिन शादी विवाह की मांग बरकरार है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है। पश्चिम एशिया युद्ध जारी रहने के बीच खाद्य तेलों का आयात प्रभावित है। इन सभी परिस्थितियों के बीच सरसों के अलावा सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम में सुधार दर्ज हुआ।

उन्होंने कहा कि देश के उत्तरी क्षेत्र- दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में आयात के बाद सोयाबीन रिफाइंड तेल का दाम 167 रुपये किलो बैठता है जबकि सरसों तेल का दाम 151-52 रुपये किलो बैठता है। सस्ता होने के कारण सरसों तेल की मांग बढ़ रही है जिससे किसानों को भी बेहतर दाम मिल रहे हैं जिसके कारण आगे जाकर सरसों की बुवाई बढ़ सकती है। किसान किसी भुलावे में ना आकर रोक-रोक कर बाजार में अपनी उपज ला रहे हैं। जिससे सरसों तेल-तिलहन में सुधार है।

सूत्रों ने कहा कि विदेशों में सोयाबीन तेल का दाम लगभग दो प्रतिशत मजबूत होने से सोयाबीन तेल कीमतों में भी मजबूती देखने को मिली। जबकि सोयाबीन के तेल-रहित खल (डी-आयल्ड केक या डीओसी) की कमजोर मांग के बीच सोयाबीन तिलहन के दाम स्थिर रहे।

उन्होंने कहा कि विदेशों में सीपीओ का दाम लगभग 3.5 प्रतिशत मजबूत हुआ है। मलेशिया एक्सचेंज के मजबूत होने तथा गर्मियों में मांग बढ़ने से पाम-पामोलीन तेल के दाम में भी सुधार आया।

सूत्रों ने कहा कि वार्षिक लेखाबंदी और ऊंचे दाम पर सुस्त कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन और डीओसी की कमजोर मांग के कारण सोयाबीन तिलहन के दाम स्थिर रहे। मूंगफली तेल का दाम ऊंचा होने की वजह से गुजरात में उपभोक्ताओं में बिनौला तेल की मांग बढ़ने से बिनौला तेल कीमतों में भी सुधार है।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,075-7,100 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 7,250-7,725 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 17,550 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,770-3,070 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 15,100 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,485-2,585 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,485-2,630 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 16,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 16,100 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 13,350 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,650 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 15,200 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,500 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 14,450 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,725-5,775 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,325-5,475 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय