नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के एक सांसद ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में दावा किया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) विधेयक, 2026 को केवल वोट हासिल करने के उद्देश्य से लाया गया था और सरकार अब इसे ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी में है।
अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच पर चर्चा में भाग लेते हुए सपा के शिवपाल सिंह पटेल ने भाजपा के शासनकाल में जातिगत भेदभाव बढ़ने का भी दावा करते हुए कहा, ‘‘देश के विश्वविद्यालय जातिवाद के अड्डे बन गये हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालयों में खुलेआम जातिवाद हो रहा है। आजकल के द्रोणाचार्य, एकलव्य (छात्रों) से अंगूठा नहीं मांगते बल्कि वे ‘वाइवा’ में नंबर काटते हैं। फाइल में ‘उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिला’ लिख देते हैं।’’
उन्होंने कहा कि सरकार यूजीसी विधेयक लेकर आई थी जिसका वह न्यायालय में बचाव नहीं कर पा रही है और उसके वकील भी न्यायालय में विधेयक के समर्थन में बहस नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया, ‘‘इसे भाजपा सरकार ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी में है। इसका मतलब है कि सरकार सिर्फ वोट के लिए यह विधेयक लाई थी जिसे आज तक संसद से पारित नहीं कराया गया।’’
सपा सांसद ने यह भी कहा कि भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद, आईआईएम कोलकाता, आईआईएम इंदौर, आईआईएम शिलांग के संकाय सदस्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व शून्य प्रतिशत है, जबकि सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व 100 प्रतिशत है।
माकपा के अमरा राम ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक समय यह देश अमेरिकी साम्राज्यवाद का मुकाबला करता था और आज अमेरिका के राष्ट्रपति कहते हैं कि भारत रूस से तेल खरीद सकता है।
भाकपा (एमएल) लिबरेशन के राजाराम सिंह ने कहा कि यह ईरान की कूटनीति है, जिसके कारण ‘‘हमें होर्मुज जलडमरूमध्य के मार्ग से गैस और तेल मिल रहा है। इसमें सरकार की कोई कूटनीतिक भूमिका नहीं है।’’
दमन और दीव से निर्दलीय सांसद उमेश भाई पटेल ने सदन में बोलने का मौका नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि क्या यह सदन भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े दलों के लिए ही है?
उन्होंने कहा, ‘‘हम कहां बोलेंगे? आप हमें सदन में नहीं बोलने देते। हम जनता को क्या जवाब दें। किसी विधेयक पर चर्चा में हमारे राज्य की आवाज यहां कौन उठाएगा।’’
भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान उनके निर्वाचन क्षेत्र बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि ‘‘…मंगलसूत्र चुरा लिया जाएगा। लेकिन आज सोना इतना महंगा हो गया है कि गरीब अपने बेटे-बेटियों की शादी के लिए भी मंगलसूत्र नहीं खरीद पा रहे हैं।’’
निर्दलीय विशालदादा प्रकाशबापू पाटिल ने कहा कि जल जीवन मिशन इस सरकार की असफलता का एक जीवंत नहीं, बल्कि ‘‘मरा हुआ उदाहरण’’ है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मिशन के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार को नहीं रोक पाई।
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) सदस्य एनके प्रेमचंद्रन ने सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान पर तंज कसते हुए कहा कि देश में यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों का एक बड़ा हिस्सा आयात किया जा रहा है।
भाषा सुभाष अविनाश
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