गांधीनगर, 25 मार्च (भाषा) गुजरात विधानसभा ने बुधवार को सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित किया, जिसमें मौजूदा कानून में संशोधन करके आतंकवाद से संबंधित प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव है, ताकि वे केंद्र की नई आपराधिक संहिता के समानांतर न हों।
गुजरात आतंकवाद एवं संगठित अपराध नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026 को उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की ओर से मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने पेश किया और विपक्षी कांग्रेस ने इसका समर्थन किया।
विधेयक लाने के पीछे के तर्क को समझाते हुए, मोढवाडिया ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के अधिनियमन के बाद संशोधन की आवश्यकता महसूस हुई, जिसमें अब आतंकवादी कृत्यों की एक व्यापक और स्पष्ट परिभाषा के साथ-साथ कठोर दंड भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य के कानून में पहले आतंकवाद और संगठित अपराध दोनों शामिल थे, क्योंकि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में आतंकवाद के लिए कोई स्पष्ट ढांचा नहीं था।
मंत्री ने कहा कि अब जब बीएनएस इस कमी को दूर कर रहा है, तो समानांतर प्रावधानों की कोई आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि बीएनएस की धारा 113 आतंकवाद को परिभाषित करती है, ऐसे में यह राज्य के कानून के समानांतर है, और कभी-कभी यह स्पष्ट नहीं होता कि किस प्रावधान के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
मोढवाडिया ने कहा, ‘‘इस अस्पष्टता को दूर करने के लिए, विधेयक के माध्यम से इस अधिनियम से ‘आतंकवाद’ शब्द को हटाने का निर्णय लिया गया है।’’
भाषा शफीक सुरेश
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