Vande Bharat/Image Credit: IBC24.in
Middle East War News: नई दिल्ली: ईरान और इजराइल के बीच गहराते युद्ध के बाद भारत सरकार एक्शन मोड में है। बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विपक्ष को भरोसे में लेने की कोशिश की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालातों पर प्रजेंटेशन दी, (All-Party Meeting News) तो पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने तेल और गैस की सप्लाई का पूरा खाका खींचा। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दावा किया कि, सरकार ने विपक्ष के हर भ्रम को दूर कर दिया है। रिजिजू के मुताबिक, विपक्ष ने भी माना कि संकट की इस घड़ी में वे देश और सरकार के साथ खड़े हैं। सबसे बड़ी चिंता ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से होने वाली तेल सप्लाई को लेकर थी, जिस पर सरकार ने बताया कि भारत ने सुरक्षित सप्लाई के लिए जरूरी कदम उठा लिए हैं।
हालांकि, बैठक के अंदर सब कुछ इतना शांत नहीं था। विपक्ष नेताओं ने बाहर निकलते ही इस बैठक को ‘असंतोषजनक’ करार दिया। विपक्ष की मांग है कि सरकार बंद कमरों के बजाय लोकसभा और राज्यसभा में इस पर खुली चर्चा कराए।
Middle East War News: लेकिन चर्चा से ज्यादा शोर ‘अनुपस्थिति’ का रहा। टीएमसी ने बैठक का बहिष्कार किया, (Middle East War News) तो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इसमें शामिल नहीं हुए। इस पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला। सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि, जब देश की सुरक्षा और तेल की कीमतों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हो रही थी, तब कांग्रेस और टीएमसी केवल राजनीति कर रहे थे।
तो साफ है कि मिडिल ईस्ट की आग की तपिश भारत की सियासत तक भी पहुंच गई है। एक तरफ सरकार एकजुटता का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष सदन में जवाबदेही चाहता है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में जंग के ये हालात भारत की जेब और कूटनीति पर क्या असर डालते हैं।
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