गुजरात की झांकी में दिखी ‘वंदे मातरम’ और भीकाजी कामा की विरासत के जश्न की झलक

गुजरात की झांकी में दिखी ‘वंदे मातरम’ और भीकाजी कामा की विरासत के जश्न की झलक

गुजरात की झांकी में दिखी ‘वंदे मातरम’ और भीकाजी कामा की विरासत के जश्न की झलक
Modified Date: January 26, 2026 / 11:45 am IST
Published Date: January 26, 2026 11:45 am IST

नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) गणतंत्र दिवस पर गुजरात की रंगारंग झांकी में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के जश्न के साथ स्वतंत्रता सेनानी भीकाजी कामा की विरासत को याद किया गया है

झांकी को देखकर वहां मौजूद लोगों ने देशभक्ति के नारे लगाए।

झांकी में कामा को ‘वंदे मातरम’ लिखा ध्वज पकड़े हुए दिखाया गया था, जिसे पहली बार 1907 में पेरिस में फहराया गया था और बाद में जर्मनी के स्टटगार्ट में समाजवादी सम्मेलन में भी फहराया गया था।

यह झांकी कामा द्वारा तैयार किए गए तिरंगे से लेकर उसके वर्तमान स्वरूप तक, तिरंगे की विरासत को भी चित्रित करती है।

कामा का जन्म गुजरात के नवसारी में हुआ था। उन्हें विदेश में भारतीय ध्वज फहराने वाली पहली महिला के रूप में जाना जाता है। उन्होंने 1907 में जर्मनी के स्टटगार्ट में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में ‘वंदे मातरम’ लिखा हुआ पहला भारतीय ध्वज फहराया था और भारत की स्वतंत्रता के लिए विदेश में रहकर भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

यह झांकी राज्य के विषय ‘स्वदेशी का मंत्र- आत्मनिर्भरता- स्वतंत्रता: वंदे मातरम’ पर तैयार की गई थी।

आधिकारिक परेड की पुस्तिका में कहा गया है, ‘वंदे मातरम वह कालातीत मंत्र है जिसने भारत की राष्ट्रीय चेतना में स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता की भावना को जागृत किया।’

इसमें कहा गया है, ‘‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह झांकी नवसारी, गुजरात की भीकाजी कामा को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, जिन्होंने क्रांतिकारियों श्यामजी कृष्ण वर्मा और सरदार सिंह राणा के साथ मिलकर भारत की आजादी का संदेश विदेशी धरती तक पहुंचाया।’’

भाषा हक हक मनीषा

मनीषा


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