नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गुरुग्राम की एक अदालत को तीन वर्षीय एक बच्ची के परिवार द्वारा विरोध स्वरूप दायर याचिका (प्रोटेस्ट पिटीशन) पर विचार करने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया। बच्ची के परिवार ने उसके साथ हुए बलात्कार के मामले की जांच से असंतुष्ट होने के कारण यह याचिका दायर की थी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल कर दिया गया है।
पीड़ित परिवार की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे इस अदालत द्वारा गठित तीन महिला आईपीएस अधिकारियों वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की गई जांच से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने निचली अदालत में ‘प्रोटेस्ट पिटीशन’ दायर की है।
पीठ ने निचली अदालत से कहा कि वह इस याचिका पर निष्पक्ष रूप से शीघ्र निर्णय करे और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करे।
उच्चतम न्यायालय ने 11 मई को गुरुग्राम की अदालत के समक्ष एसआईटी की जांच रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति दे दी थी।
उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश उस याचिका पर पारित किया, जो बच्ची के पिता ने इस मामले में अदालत की निगरानी में एसआईटी से जांच कराने का अनुरोध करते हुए दायर की थी।
पुलिस ने बताया था कि सेक्टर 54 की एक सोसाइटी में दो घरेलू सहायिकाओं और उनके पुरुष साथी ने कथित तौर पर एक नाबालिग का लगभग दो महीने तक यौन उत्पीड़न किया।
बच्ची के माता-पिता द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद, चार फरवरी को सेक्टर 53 पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पुलिस के अनुसार, हालांकि यह घटना दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच हुई थी, लेकिन बच्ची द्वारा अपनी आपबीती अपनी मां को बताने के बाद उसके माता-पिता ने पुलिस को इस मामले की सूचना दी थी।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
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