Gymkhana Club Delhi News || Image- IBC24 News File
नयी दिल्ली: दिल्ली जिमखाना क्लब के कर्मचारियों ने मंगलवार को कहा कि क्लब की जमीन के विवाद में दिल्ली उच्च न्यायालय से उन्हें अस्थायी राहत मिली है, लेकिन उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कई कर्मचारियों को डर है कि अगर यह प्रतिष्ठित संस्थान अंततः बंद हो जाता है या कहीं और स्थानांतरित हो जाता है, तो उनकी आजीविका छिन जाएगी। (Gymkhana Club Delhi News) दिल्ली उच्च न्यायालय ने इससे पहले दिन में केंद्र सरकार के इस कथन पर ध्यान दिया कि वह पांच जून तक क्लब परिसर पर जबरन कब्जा नहीं करेगी और कहा कि यदि कोई बेदखली की कार्यवाही होती है, तो वह कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए की जाएगी।
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क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों ने अंतरिम राहत का स्वागत किया, लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि यह राहत केवल अस्थायी है और क्लब पर निर्भर लगभग 700 कर्मचारियों और संबंधित श्रमिकों में चिंता बनी हुई है। जिमखाना कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष नंदन सिंह नेगी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘हमें फिलहाल आठ सप्ताह के लिए राहत मिली है। हमें उच्च न्यायालय पर भरोसा है कि वह मजदूरों और गरीब लोगों के लिए न्याय करेगा।’ उन्होंने श्रमिकों के बीच फैली अनिश्चितता का वर्णन करते हुए कहा, “हमारी सांसें थम सी गई हैं। ऐसा लग रहा है जैसे हम ऑक्सीजन सपोर्ट पर सांस ले रहे हों।”
नेगी ने बताया कि क्लब सदस्यों द्वारा दायर याचिकाओं के अलावा, कर्मचारी संघ ने सोमवार शाम को दिल्ली उच्च न्यायालय में एक मुकदमा दायर किया है। मामले से जुड़े एक अन्य कर्मचारी ने बताया, “दो मुकदमे सदस्यों की ओर से और एक श्रमिकों की ओर से था। (Gymkhana Club Delhi News) तीनों की सुनवाई एक साथ हुई।” कर्मचारियों के अनुसार, अदालत ने अगली सुनवाई से पहले, जो जुलाई के अंत में अदालत के फिर से खुलने के बाद निर्धारित है, कर्मचारियों की संख्या और उनकी सेवा अवधि सहित कार्यबल से संबंधित विवरण मांगे हैं।
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केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बेदखली की कार्यवाही केवल कानून के अनुसार और उचित नोटिस देने के बाद ही शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा, “पांच जून वह तारीख है, जिस दिन हमने पट्टाधारक को स्वयं परिसर खाली करने का विकल्प दिया है। मीडिया में चल रही चर्चाओं के विपरीत ऐसा नहीं है कि पुलिस वहां पहुंचकर जबरन कब्जा ले लेगी। परिसर का अधिग्रहण कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाएगा।”
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