चंडीगढ़, दो जून (भाषा) हरियाणा सरकार ने सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने और अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) शिक्षा ग्रहण करने वाले सेवारत चिकित्सकों से जुड़ी अपनी नीति में संशोधन किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने बताया कि संशोधित नीति के तहत सरकारी सेवा में रहते हुए ‘क्लिनिकल’ विशिष्टताओं में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने वाले सेवारत चिकित्सकों को अब चिकित्सा शिक्षा बॉण्ड भरने की आवश्यकता नहीं होगी और वे अपने मूल विभागों में सेवा देते रहेंगे।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस फैसले से पूरे हरियाणा में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
संशोधित नीति के मुताबिक, जो सेवारत चिकित्सक राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों में आरक्षण का लाभ उठाकर ‘प्री-क्लिनिकल’ और ‘पैरा-क्लिनिकल’ विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम पूरा करेंगे, उन्हें डीएमईआर के तहत संचालित चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में तीन साल तक अनिवार्य रूप से सेवा देनी होगी।
अनिवार्य कार्यकाल पूरा करने के बाद, ऐसे चिकित्सकों को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में स्थायी रूप से शामिल होने का विकल्प दिया जाएगा, जिससे सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर हो सकेगी।
भाषा सुमित अविनाश
अविनाश