कोलकाता, 21 मई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी को पिछले महीने एक जनसभा में दिए गए उनके बयानों को लेकर दर्ज प्राथमिकी में 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया।
न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी सांसद के लिए इस तरह के अनुचित बयान देना सही है।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बनर्जी को जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारी द्वारा भेजे गए नोटिसों का अनुपालन करने का निर्देश दिया।
अदालत ने उन्हें न्यायालय की अनुमति के बिना विदेश यात्रा न करने का भी निर्देश दिया।
डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उस प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले 27 अप्रैल को एक जनसभा में प्रतिद्वंद्वी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दिए गए उनके बयानों को लेकर दर्ज की गई थी।
बनर्जी द्वारा ‘‘गैर-जिम्मेदाराना बयान’’ दिए जाने पर सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि अगर तृणमूल चुनाव जीत जाती तो क्या होता।
उन्होंने यह भी कहा, ‘‘इस राज्य का चुनाव के बाद हिंसा का पुराना इतिहास रहा है।’’
न्यायाधीश ने यह भी सवाल कि क्या सार्वजनिक सभा में बनर्जी के बयान तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के पद की गरिमा के अनुरूप थे।
अदालत ने उन्हें 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देते हुए कहा कि वह 20 जुलाई को इस मामले की फिर से सुनवाई करेगी।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने बनर्जी की याचिका का विरोध किया, लेकिन यह भी कहा कि जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
भाषा खारी वैभव
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