नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने आसूचना ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दो दोषियों की अपील पर बुधवार को दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 के दंगों के दौरान भीड़ ने अंकित शर्मा पर हमला कर दिया था और उनका शव नाले में फेंक दिया था।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने नाजिम और कासिम की अपील सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी किया।
अदालत ने आजीवन कारावास की सजा निलंबित करने के अनुरोध वाली दोषियों की याचिका पर भी नोटिस जारी किया और मामलों को सुनवाई के लिए दो दिसंबर को सूचीबद्ध किया।
दोनों अपीलकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि अधीनस्थ अदालत द्वारा उन्हें दोषी ठहराए जाने का फैसला कायम नहीं रह सकता।
उन्होंने दलील दी कि इस मामले में आरोपियों की शिनाख्त परेड नहीं कराई गई थी और गवाह के बयान की पुष्टि किसी स्वतंत्र साक्ष्य से नहीं हुई थी।
पीठ ने कहा, ‘‘(अपील को सुनवाई के लिए) स्वीकार किया जाता है। हम नोटिस जारी कर रहे हैं।’’
अभियोजन पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता रजत नायर ने कहा कि राज्य भी अधीनस्थ अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेगा क्योंकि उसने छह आरोपियों को बरी कर दिया है।
अदालत ने इस मामले में 31 जुलाई को आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 153ए (शत्रुता को बढ़ावा देना), 149 (गैर कानूनी रूप से एकत्र होना), 355 के साथ पठित 149 (आपराधिक बल एवं हमला), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करना) और 147 (दंगा करना) के तहत दोषी ठहराया था।
अदालत ने 31 जुलाई को हुसैन और चार सह-दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
यह मामला अंकित शर्मा के पिता रवींद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है।
भाषा खारी सिम्मी
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