अरुणाचल प्रदेश में बृहस्पतिवार से भारी बारिश, आंधी का अनुमान

अरुणाचल प्रदेश में बृहस्पतिवार से भारी बारिश, आंधी का अनुमान

अरुणाचल प्रदेश में बृहस्पतिवार से भारी बारिश, आंधी का अनुमान
Modified Date: September 10, 2025 / 03:37 pm IST
Published Date: September 10, 2025 3:37 pm IST

ईटानगर, 10 सितंबर (भाषा) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अरुणाचल प्रदेश में बृहस्पतिवार से बारिश की गतिविधियां तेज होने का अनुमान जताया है और राज्य में अगले कुछ दिनों तक गरज के साथ भारी वर्षा तथा आंधी की चेतावनी जारी की है।

आईएमडी के मुताबिक, 12 से 14 सितंबर के बीच पूरे अरुणाचल में छिटपुट जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है और यह दौर कम से कम 15 सितंबर तक जारी रह सकता है।

विभाग के अनुसार, पापुम पारे राज्य में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक रहेगा, जहां 12 और 13 सितंबर के बीच बहुत भारी वर्षा (24 घंटे में 11 से 20 सेंटीमीटर) होने की आशंका है।

आईएमडी ने बताया कि इसी अवधि में पूर्वी कामेंग और अंजॉ को भी भारी बारिश (24 घंटों में 7 से 11 सेंटीमीटर) का सामना करना पड़ सकता है।

विभाग ने बताया कि पापुम पारे, पूर्वी कामेंग, लोअर सुबनसिरी, अंजॉ और चांगलांग में 13-14 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है, जबकि पश्चिमी कामेंग में 14 और 15 सितंबर के बीच बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है।

आईएमडी ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और जलभराव की समस्या सामने आ सकती है। उसने कहा है कि इन इलाकों में यातायात अवरुद्ध होने, पेड़ गिरने से बिजली एवं संचार लाइनों को नुकसान पहुंचने और होर्डिंग्स तथा टेंट जैसी कमजोर संरचनाओं के नष्ट होने की भी आशंका है।

आईएमडी के मुताबिक, भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण कृषि एवं बागवानी क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंच सकता है। उसने कहा कि खुले क्षेत्रों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली के कारण लोगों और मवेशियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

अधिकारियों ने निवासियों को सतर्क रहने, जलभराव एवं भूस्खलन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की यात्रा से बचने और आधिकारिक यातायात परामर्श का पालन करने की सलाह दी है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया है कि वे खड़ी फसल वाले खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, बीज बुवाई स्थगित करें और मिट्टी एवं फसलों को अत्यधिक नमी से बचाने के लिए ‘मल्चिंग’ तकनीक का इस्तेमाल करें।

‘मल्चिंग’ मिट्टी की ऊपरी परत को पत्तों, घास, लकड़ी के टुकड़ों, पुआल, खाद या फसल अवशेषों जैसे जैविक पदार्थों से ढकने की एक कृषि एवं बागवानी तकनीक है।

आईएमडी के अनुसार, पश्चिमी कामेंग के दिरांग में पिछले 24 घंटों में सात सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है।

भाषा पारुल पवनेश

पवनेश


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