हिमाचल सरकार ने रैगिंग के कारण दलित छात्रा की मौत के मामले में जांच समिति गठित की

हिमाचल सरकार ने रैगिंग के कारण दलित छात्रा की मौत के मामले में जांच समिति गठित की

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  • Publish Date - January 3, 2026 / 05:57 PM IST,
    Updated On - January 3, 2026 / 05:57 PM IST

शिमला (हिमाचल प्रदेश), तीन जनवरी (भाषा) हिमाचल प्रदेश सरकार ने कथित रूप से रैगिंग के कारण 19 वर्षीय दलित छात्रा की मौत को लेकर बढ़ते आक्रोश के मद्देनजर शनिवार को एक समिति गठित करने की बात कही, जो कॉलेज में एक प्रोफेसर द्वारा कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किए जाने और जातिसूचक अपशब्द कहे जाने समेत सभी पहलुओं की जांच करेगी।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया।

इसके अलावा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भी धर्मशाला में स्थित सरकारी डिग्री कॉलेज में छात्रा की मौत से संबंधित मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति गठित की है। इससे पहले यूजीसी रैगिंग रोधी हेल्पालइन ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शिकायत दर्ज की थी।

सुक्खू ने कहा कि “छात्रा के वीडियो बयान के आधार पर आरोपी प्रोफेसर को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। इस वीडियो में उसने प्रोफेसर का नाम लिया था।”

मुख्यमंत्री ने सोलन जिले के कंडाघाट में पत्रकारों से कहा, “प्रोफेसर के खिलाफ जांच शुरू की जाएगी और सभी संलिप्त दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।”

लुधियाना के अस्पताल में इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई। छात्रा के पिता की ओर से मिली शिकायत के आधार पर तीन छात्रों के खिलाफ रैगिंग के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके अलावा एक जनवरी को प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया।

शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा ने शनिवार को कहा, “धर्मशाला के सरकारी कॉलेज की छात्रा की मौत से संबंधित मामले में तथ्यान्वेषण/प्रारंभिक जांच के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक हरीश कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की गई है। धलियारा, बैजनाथ और नौरा सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपल इसके सदस्य होंगे।”

शर्मा ने कहा कि समिति सभी पहलुओं की जांच करके तीन दिन में समग्र रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

दूसरी ओर यूजीसी के एक अधिकारी ने कहा कि उन्होंने घटना को गंभीरता से लिया है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

दिल्ली में एक अधिकारी ने कहा, “यूजीसी रैगिंग रोधी हेल्पलाइन ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शिकायत दर्ज की है, जिनमें रैगिंग के कारण आत्महत्या का आरोप लगाया गया है। वहीं, कॉलेज अधिकारियों का कहना है कि यह मामला आत्महत्या नहीं, बल्कि मृत्यु का है।”

अधिकारी ने कहा, “पुलिस जांच जारी है और यूजीसी ने घटना की जांच के लिए एक तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया है। यूजीसी आश्वासन देता है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है।”

शिकायत में, छात्रा के पिता ने आरोप लगाया कि 18 सितंबर, 2025 को उनकी बेटी को तीन वरिष्ठ छात्रों ने पीटा, जबकि कॉलेज के प्रोफेसर ने उसके साथ अश्लील हरकतें कीं। आरोपी प्रोफेसर ने खुद पर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है।

कांगड़ा पुलिस ने शनिवार को एक बयान में कहा कि इस मामले की जांच धर्मशाला के पुलिस उपाधीक्षक द्वारा की जा रही है और चिकित्सा रिकॉर्ड, वीडियो क्लिप व गवाहों के बयानों समेत सभी प्रासंगिक सबूत एकत्र किए जा रहे हैं।

पुलिस ने कहा, ‘मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए पीड़ित के पिता का बयान भी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज करने का प्रस्ताव है।’

इस बीच, आंबेडकर महासभा के सदस्यों ने शनिवार को धर्मशाला में पीड़ित के लिए न्याय और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, अखिल भारतीय आंबेडकर महासभा की प्रदेश अध्यक्ष और सुलाह विधानसभा क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य रूप रेखा ने बताया कि उन्होंने पीड़िता के परिवार से मुलाकात की।

उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज परिसर में पीड़िता के बाल काटे गए और उसके सिर पर बोतल से हमला भी किया गया।

हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग ने भी इस संबंध में कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी है।

भाषा

जोहेब दिलीप

दिलीप