धर्मशाला, दो जून (भाषा) हिमाचल प्रदेश में लगभग चार वर्ष के अंतराल के बाद मंगलवार को पठानकोट–जोगिंदरनगर रेलवे लाइन पर रेल सेवाएं फिर से शुरू हो गईं, जिससे कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन संपर्क बहाल हो गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
रेल सेवाओं के पुनः संचालन का पूरे क्षेत्र में उत्साह के साथ स्वागत किया गया और यात्रियों ने खुशी जाहिर की।
कई यात्रियों ने रेल यात्रा से होने वाली बचत को रेखांकित करते हुए बताया कि एक ओर जोगिंदरनगर तक बस यात्रा का किराया लगभग 392 रुपये है, वहीं ट्रेन का किराया प्रति यात्री केवल लगभग 40 रुपये है। मंगलवार को इस मार्ग पर करीब 60 यात्रियों ने यात्रा की।
मंगलवार सुबह पठानकोट सिटी नैरो गेज रेलवे स्टेशन से सात-सात डिब्बों वाली दो ट्रेन रवाना हुईं। ट्रेन संख्या 62465 सुबह पांच बजे चली, जबकि ट्रेन संख्या 52467 सुबह सात बजे रवाना हुई। हिमाचल प्रदेश की ओर से सेवाएं सुबह 8:30 बजे कांगड़ा रेलवे स्टेशन से शुरू हुईं।
पंजाब-हिमाचल प्रदेश सीमा पर स्थित चक्की रेलवे पुल का एक बड़ा हिस्सा भीषण बाढ़ में क्षतिग्रस्त होने के कारण इस ऐतिहासिक रेल मार्ग पर अगस्त 2023 से रेल परिचालन बंद था।
रेल संपर्क बहाल करने के लिए रेल मंत्रालय ने युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया और लगभग 70 करोड़ रुपये की लागत से एक नया अत्याधुनिक रेलवे पुल बनाया। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा व्यापक ट्रैक निरीक्षण और सफल संचालन परीक्षण के बाद अब नियमित सेवाएं फिर से शुरू कर दी गई हैं।
हमीरपुर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रेल संचालन बहाल किया।
ठाकुर ने सभा को संबोधित करते हुए स्वीकार किया कि रेल सेवाएं बहाल होने में अपेक्षा से अधिक समय लगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लगातार केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के समक्ष उठाया जाता रहा।
उन्होंने कहा, “यह रेलवे लाइन पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों के लिए केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि उनकी जीवनरेखा है।”
उन्होंने कहा कि इसकी शीघ्र बहाली सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए गए। भाषा जोहेब पवनेश
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