जीबी रोड के तंग वेश्यालयों में पुलिस के कार्यक्रमों से जगी आस; शिक्षा और सुधार की दिशा में बदलाव

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जीबी रोड के तंग वेश्यालयों में पुलिस के कार्यक्रमों से जगी आस; शिक्षा और सुधार की दिशा में बदलाव

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  • Publish Date - March 29, 2026 / 10:05 PM IST,
    Updated On - March 29, 2026 / 10:05 PM IST

(सौम्या शुक्ला)

नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) दिल्ली के रेड-लाइट इलाके में जीबी रोड के नाम से चर्चित ‘गार्स्टिन बैस्टियन रोड’ स्थित एक बहुमंजिला वेश्यालय के छोटे से हॉल में मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-सम्मान पर केंद्रित एक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 40 यौनकर्मियों ने अपनी दिनचर्या रोककर हिस्सा लिया।

दो घंटे के इस सत्र के दौरान हॉल में ‘मैं खुद के लिए गर्व महसूस करती हूं’ जैसे सकारात्मक वाक्य गूंजते रहे।

प्रतिदिन 15 से 20 ग्राहकों की यौन इच्छा पूरी करने के साथ ही अक्सर मादक पदार्थों के प्रभाव में रहने वाली यौनकर्मियों के लिए ये क्षण दुर्लभ राहत और हंसने का अवसर प्रदान करने वाले साबित हुए।

हॉल में तीन फुट गुणा पांच फुट के पांच छोटे-छोटे कमरे हैं, जिनका उपयोग महिलाएं सोने और अपने धंधे के लिए करती हैं।

उन्हें नियमित तौर पर परामर्श देने वाली एक गैर-सरकारी संगठन की कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘इन महिलाओं को अपना नाम लिखने में भी संघर्ष करना पड़ता है। उनमें से अधिकांश को इस बात की बहुत कम समझ है कि उनके खिलाफ अपराध क्या होता है। उनके आंतरिक आघात ने उन्हें शारीरिक दर्द के प्रति असंवेदनशील बना दिया है।’’

जीबी रोड स्थित महिला पुलिस चौकी की प्रभारी उपनिरीक्षक किरण ने एक गैर-सरकारी संगठन के सहयोग से इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया। किरण को ‘लेडी सिंघम’ के नाम से जाना जाता है।

फरवरी 2024 में स्थापित महिला पुलिस चौकी, शहर की पहली दो महिला पुलिस चौकियों में से एक है।

तब से यह चौकी एक ऐसे क्षेत्र में सशक्तीकरण का एक शांत लेकिन शक्तिशाली केंद्र बनकर उभरी है, जहां सैकड़ों बहुमंजिला वेश्यालय और 1,000 से अधिक यौनकर्मी मौजूद हैं।

पुलिस चौकी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने के उद्देश्य से नियमित रूप से कौशल विकास और जागरूकता कार्यक्रम चलाती है।

पुलिस चौकी की पहली मंजिल पर कोचिंग कक्षाएं, मेकअप आर्टिस्ट प्रशिक्षण, सिलाई पाठ्यक्रम, खाना पकाने के सत्र और परामर्श जैसी पहल आयोजित की जाती हैं।

अन्य गतिविधियों में कढ़ाई, बैग बनाना, मिट्टी के बर्तन बनाना और फिल्म से संबंधित पहलों के माध्यम से रचनात्मक अनुभव प्रदान करना शामिल है।

आत्मरक्षा और जागरूकता सत्र भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। बाईस मार्च को, लगभग 50 महिलाओं ने पुलिस द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया, जहां उन्हें उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया गया।

क्षेत्र में बच्चों के लिए भी शैक्षिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जिससे 50 से अधिक लड़कियों को बुनियादी शिक्षा और कंप्यूटर का प्रारंभिक ज्ञान प्राप्त हुआ है।

स्वास्थ्य और स्वच्छता इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वर्ष 2023 से नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनसे यौनकर्मियों और स्थानीय निवासियों दोनों को लाभ मिल रहा है।

लगभग 500 व्यक्तियों को चश्मे उपलब्ध कराए गए, जबकि मौलाना आजाद डेंटल अस्पताल के सहयोग से दांत की जांच की जाती है। स्वच्छता के बारे में जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है, जिसमें सैनिटरी नैपकिन का वितरण और सुरक्षित प्रथाओं के बारे में मार्गदर्शन करना शामिल है।

पुलिस चौकी के भीतर एक विशेष परामर्श कक्ष में महीने में लगभग 20 दिन मानसिक स्वास्थ्य परामर्श प्रदान किया जाता है। नशामुक्ति जागरूकता अभियान और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन भी इस पहल का हिस्सा हैं।

लेकिन, जहां उपरोक्त तथ्य आंकड़े प्रदान करते हैं, वहीं वास्तविक जीवन में इसके प्रभाव को देखना आशा और साहस की कहानी बयां करता है। एक मामले में, एक वेश्यालय से बचाई गई एक महिला को उसके दो बच्चों के साथ चिकित्सा देखभाल और आश्रय प्रदान किया गया। इस महिला के दोनों बच्चे अब शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिसमें उसका एक दिव्यांग बेटा शामिल है।

हस्तशिल्प और केक बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली एक अन्य महिला वर्तमान में राजौरी गार्डन के एक रेस्तरां में कार्यरत है। अन्य महिलाओं को मेकअप आर्टिस्ट, पेपर क्राफ्ट और इसी तरह के अन्य कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे स्वरोजगार में अपना योगदान दे सकें।

एक महिला को ई-रिक्शा भी दिया गया है, जिसे चलाकर वह अपनी आजीविका कमाती है।

‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए लगभग 35 वर्षीय पूजा (परिवर्तित नाम) ने कहा, ‘मैंने पहले कभी इतना आत्मविश्वास महसूस नहीं किया। मुझे अपने नाम की वर्तनी तक नहीं आती थी। आज मैं इसे लिख सकती हूं और बुनियादी बातें भी समझ सकती हूं। जब भी हमें लगता है कि हमारे साथ कुछ गलत हो रहा है, तो हम चौकी जाकर मैडम (उपनिरीक्षक किरण) को खुलकर बता सकते हैं।’’ पूजा पिछले छह महीनों से नियमित रूप से कोचिंग कक्षा में हिस्सा ले रही है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस चौकी के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक नाबालिगों समेत 50 से अधिक महिलाओं को वेश्यालयों से बचाया जा चुका है, जिनमें से कई को आश्रय गृहों, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों के माध्यम से पुनर्वासित किया गया है।

इस पहल ने सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को भी बढ़ावा दिया है। फरवरी 2025 में, अपनी तरह के पहले प्रयास में, 17 यौनकर्मियों ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में ‘पर्दा’ नामक नाटक का मंचन किया। वर्ष 2024 से अब तक कई बार नुक्कड़ नाटक भी आयोजित किए गए हैं।

किरण सभी की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करती हैं।

ऐसा ही एक उदाहरण तब देखने को मिला जब एक यौनकर्मी अपने पति के खिलाफ मारपीट और गहने चोरी की शिकायत दर्ज कराने के लिए किरण के कार्यालय पहुंची।

किरण ने धैर्यपूर्वक चार पन्नों की शिकायत लिखी, और लिखते समय प्रत्येक शब्द को जोर से बोलकर बताया।

उन्होंने शिकायतकर्ता को बताया कि कही गई हर बात को दर्ज किया गया है और उसकी निरक्षरता को ध्यान में रखते हुए उससे इसे सत्यापित करने के लिए कहा।

शिकायतकर्ता ने कहा, ‘‘मैडम, मुझे आप पर पूरा भरोसा है।’’ किरण ने फिर उस महिला से पुलिस चौकी में चल रही कक्षाओं में भाग लेने का आग्रह किया।

महिला का हाथ अपने सिर पर रखते हुए ‘लेडी सिंघम’ किरण ने कहा, ‘‘मेरी कसम खा कि तू आएगी, नहीं तो मेरी मौत तेरे सर होगी।’’

समाज द्वारा अक्सर तिरस्कृत और अलग नजरिये से देखी जाने वाली इन महिलाओं को अब पास में ही एक महिला पुलिस चौकी होने से राहत मिली है।

भाषा संतोष सुरेश

सुरेश