लेह, 24 जून (भाषा) लद्दाख के पर्यटन क्षेत्र में बाहरी लोगों के बढ़ते निवेश को लेकर चिंता के बीच, ‘ऑल लद्दाख होटल एंड गेस्ट हाउस एसोसिएशन’ ने बुधवार को कहा कि क्षेत्र में एक ऐसे पर्यटन विकास मॉडल की जरूरत है जो सतत, समावेशी और स्थानीय लोगों के लिए लाभकारी हो।
एसोसिएशन की अध्यक्ष रिगजिन वांगमो लचिक ने कहा कि वे विकास या निवेश के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि यह चाहते हैं कि लद्दाख में पर्यटन का विकास स्थानीय समुदायों और क्षेत्र के दीर्घकालिक हितों के अनुरूप ही हो।
उन्होंने यह भी कहा कि मनाली, शिमला और गोवा जैसे पर्यटन स्थलों के अनुभवों से सीखने की जरूरत है, जहां तेज और अक्सर अनियंत्रित विकास ने बुनियादी ढांचे, संसाधनों पर दबाव, पर्यावरण में गिरावट और स्थानीय भागीदारी से जुड़ी बड़ी चुनौतियां पैदा की हैं।
लचिक ने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर एक एसोसिएशन के रूप में हमारे रुख को अक्सर गलत समझा जाता है। हमारी चिंता विकास को रोकने, निवेश को हतोत्साहित करने या मौजूदा कारोबारियों के लिए एकाधिकार बनाने की नहीं है। बल्कि हमारी चिंता यह सुनिश्चित करने की है कि लद्दाख में पर्यटन का विकास सतत, समावेशी और लद्दाख के लोगों के लिए फायदेमंद हो।’
उन्होंने बताया कि पर्यटन उन कुछ क्षेत्रों में से एक है जिसने स्थानीय परिवारों, उद्यमियों, युवाओं, महिलाओं, अतिथि गृह मालिकों, होमस्टे संचालकों, परिवहन सेवा प्रदाताओं, गाइड, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आर्थिक अवसर पैदा किए हैं।
लचिक ने कहा कि लद्दाख सीमित प्राकृतिक संसाधनों, संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र और अनूठी सांस्कृतिक विरासत वाला क्षेत्र भी है।
उन्होंने कहा, ‘‘कई अन्य पर्यटन स्थलों के विपरीत, हमारी वहन क्षमता सीमित है। हमारे सामने चुनौती सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि पर्यटन का विकास हमारे लोगों तथा पर्यावरण के दीर्घकालिक हितों के अनुरूप बना रहे।’’
उन्होंने बताया कि 52 साल से ज्यादा समय से लद्दाख के पर्यटन हितधारकों ने मिलकर एक ऐसा मॉडल बनाने के लिए काम किया है जिसमें पर्यटन का लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था में बंट सके।
भाषा खारी नरेश
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