एनआईए के छापों में हुर्रियत नेताओं को लिखे कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के लेटरहेड पर लिखे हुए हैं। दस्तावेजों से स्पष्ट है कि हुर्रियत नेता समय-समय पर लश्कर और हिजबुल मुजाहिद्दीन अलगाववादियों को फंड पहुंचाते रहे हैं।