अगर किसी राजनीतिक दल पर जनता का विश्वास है तो वह भाजपा है : भजनलाल शर्मा

अगर किसी राजनीतिक दल पर जनता का विश्वास है तो वह भाजपा है : भजनलाल शर्मा

अगर किसी राजनीतिक दल पर जनता का विश्वास है तो वह भाजपा है : भजनलाल शर्मा
Modified Date: April 14, 2024 / 09:53 pm IST
Published Date: April 14, 2024 9:53 pm IST

जयपुर, 14 अप्रैल (भाषा) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को कहा कि मौजूदा समय में किसी भी राजनीतिक दल पर जनता का विश्वास नहीं रहा है और अगर किसी राजनीतिक दल पर जनता का विश्वास है तो वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘किसी भी राजनीतिक दल पर जनता का विश्वास नहीं रहा है, लेकिन अगर जनता का विश्वास किसी राजनीतिक दल पर है तो वो भाजपा है जिस पर जनता का विश्वास है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ देश और प्रदेश की जनता भाजपा के कार्यकर्ताओं की तरफ देख रही है। कार्यकर्ता जनता के विश्वास को बनाये रखें और उसके दुख और दर्द में उसका सहयोग करें और हमारी योजनाओं का उन्हें लाभ दिलायें।’’

शर्मा ने कहा कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी योजना) का सबसे ज्यादा लाभ भरतपुर को मिलेगा। भरतपुर के रूपवास में प्रबुद्धजन सम्मेलन को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि ईआरसीपी के पानी से पांचना बांध जुड़ेगा और वहां से डूंगरी बांध से दौसा होते हुए अलवर के बांध तथा सीकरी के बांध में भी पानी आयेगा और सीधा मोती झील को पानी पहुंचेगा।

उन्होंने कहा कि इस योजना से पीने का पानी भी मिलेगा और दो लाख अस्सी हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई भी होगी।

उन्होंने कहा इससे कुम्हेर, डीग, नदबई, बयाना, रूपवास और घना अभयारण्य को भी उसका फायदा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जिसके मन में काम करने की तमन्ना हो.. जिसको यह एहसास होता है कि मुझे काम करना है उसको दुनिया की कोई ताकत नहीं रोकती है।’’

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा बिजली में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार राज्य को 90 हजार करोड़ का घाटा देकर गई है। तीन साल बाद राजस्थान बिजली खरीदेगा नहीं बल्कि वह बिजली बेचने वाला होगा। इसलिये हम दो साल बिजली और पानी पर काम करेंगे।

मुख्यमंत्री ने पेपर लीक मामले का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘जिन्होंने युवाओं की आंखों में आंसू लाने का काम किया है.. युवाओं के सपने तोड़ने का काम किया है… उनमें से एक को भी किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे चाहे वह कितना भी बड़ा व्यक्ति क्यों न हो। ’’

भाषा कुंज कुंज रवि कांत


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