नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) राज्यसभा में बृहस्पतिवार को तृणमूल कांग्रेस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पिछले सप्ताह पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा और बल प्रयोग के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। वहीं भाजपा ने गृह मंत्री का बचाव करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति का आकलन करने के बाद मजिस्ट्रेट बल प्रयोग के बारे में फैसला करते हैं।
उच्च सदन में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान तृणमूल सदस्य सागरिका घोष ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने का विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, पेलेट गन और एके-47 तक का इस्तेमाल किया।
उन्होंने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के लिए गृह मंत्री को जिम्मेदार ठहराते उनके इस्तीफे की मांग की।
तृणमूल सदस्य ने कहा कि परीक्षा रद्द होना और प्रश्नपत्र लीक होना सरकार की नाकामी है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की इस नाकामी के कारण 21 बच्चों की जान चली गयी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री या सरकार ने इन बच्चों की मौत पर अफसोस या हमदर्दी तक नहीं जतायी। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के कई नेताओं के बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं इसलिए वे ऐसी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि यह सरकार युवाओं की बात, छात्रों की बात नहीं समझती और वह सिर्फ ‘मन की बात’ समझती है।
भाजपा के बृजलाल ने कहा कि गृह मंत्री शाह ने घोषणा की थी कि देश 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा और देश अब नक्सलवाद एवं आतंकवाद से मुक्त है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं और मजिस्ट्रेट स्थिति का आकलन करने के बाद कार्रवाई के संबंध में फैसला करता है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बिगड़ने पर पहले प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी जाती है और यहां भी चेतावनी दी गयी थी।
बृजलाल ने कहा कि सरकार ने छात्रों से बातचीत की थी और उसने असामाजिक तत्वों से बातचीत नहीं की।
उन्होंने प्रस्तावित कानून का जिक्र करते हुए कहा कि यह 2024 के मूल कानून में परिवर्तन के लिए यह विधेयक लाया गया है और इस सरकार की नीति साफ है। उन्होंने कहा कि इस कानून में प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए सख्त प्रावधान कदम उठाए गए हैं वहीं राज्यों को अधिकार दिए गए हैं।
भाजपा सदस्य ने उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने नकल और भ्रष्टाचार को बढावा दिया जिससे एक समय उत्तर प्रदेश नकल माफिया की राजधानी बन गया था।
चर्चा में भाग लेते हुए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सदस्य टी शिवा ने नीट परीक्षा को खत्म करने की मांग की और कहा कि इस विधेयक से स्थिति में कोई व्यापक बदलाव नहीं आने वाला है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सरकार का निष्फल और ध्यान भटकाने वाला प्रयास है।
शिवा ने कहा कि इस विधेयक से छात्रों की आत्महत्या पर रोक नहीं लग सकेगी और सरकार को छात्रों की भावना को समझना चाहिए तथा उनसे बातचीत करनी चाहिए।
बीजू जनता दल के संतृप्त मिश्रा ने सवाल किया कि इस विधेयक से मौजूदा स्थिति में क्या बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक अपराध नहीं रोकता है बल्कि अपराध हो जाने के बाद की स्थिति से निपटता है। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक जल्दबाजी में लाया गया और इस पर ज्यादा चर्चा नहीं की गयी।
उन्होंने जोर दिया कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली और संस्थानों में सुधार की जरूरत है तथा सरकार को शिक्षा की बुनियादी समस्याओं के बारे में सोचना चाहिए।
भाषा अविनाश माधव
माधव