पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत और ईयू ने ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा की

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पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत और ईयू ने ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा की

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  • Publish Date - March 17, 2026 / 09:22 PM IST,
    Updated On - March 17, 2026 / 09:22 PM IST

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में विकराल होते संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर इसके दूरगामी प्रभावों पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (ईयू) के 27 सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति की आवश्यकता को रेखांकित किया।

ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरे समुद्री परिवहन मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) का करीब 20 प्रतिशत व्यापार होता है।

भारत बड़े पैमाने पर पश्चिम एशिया से अपनी ऊर्जा जरूरतों का आयात करता है।

यूरोपीय संघ की विदेश और सुरक्षा नीति प्रमुख काजा कल्लास के निमंत्रण पर जयशंकर बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स के दौरे पर गए थे। वहां उन्होंने यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों से बनी विदेश मामलों की परिषद की बैठक में हिस्सा लिया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय संघ के नेतृत्व के बीच जनवरी में हुई शिखर वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया था। भारत-ईयू एफटीए के बाद ब्रसेल्स स्थित यूरोपीय संघ की यह भारत की पहली उच्च स्तरीय यात्रा थी।

जयशंकर ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और जर्मनी और बेल्जियम जैसे यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें भी कीं।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि विदेश मंत्री ने जनवरी में हुए भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के बाद रिश्तों में आई मजबूती पर प्रकाश डाला और सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी के तहत रक्षा औद्योगिक सहयोग और समुद्री सहयोग को प्रगाढ़ करने के अलावा, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की पूरी क्षमता का उपयोग करने का आह्वान किया।

जयशंकर ने भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद को अधिक ‘परिणामोन्मुखी’ मंच में बदलने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों से भारत के ईयू और सदस्य देशों के साथ संबंधों में तालमेल बिठाने का आग्रह किया। उनकी इस भावना का यूरोपीय संघ के उनके समकक्षों ने पूरी तरह से समर्थन किया।’’

मंत्रालय के मुताबिक, मंत्रियों ने वैश्विक स्तर पर व्याप्त चुनौतियों, विशेष रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा पर इसके प्रभाव शामिल हैं, पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और संवाद एवं कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया।

बयान के मुताबिक, ‘‘उन्होंने यूक्रेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर भी चर्चा की। विदेश मंत्री ने स्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने और बहुपक्षवाद को मजबूत करने में भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते तालमेल को रेखांकित किया।’’

विदेश मामलों की परिषद की बैठक से इतर जयशंकर ने कल्लास के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।

इसमें कहा गया, ‘‘दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय संघ के सहयोग को उच्च रणनीतिक स्तर तक ले जाने की अपनी साझा महत्वाकांक्षा दोहराई। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय मामलों पर नियमित परामर्श के महत्व को भी रेखांकित किया।’’

जयशंकर ने बेल्जियम, साइप्रस, जर्मनी, यूनान और नीदरलैंड के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं।

भाषा धीरज शफीक

शफीक