मोदी और रोड्रिगेज के बीच वार्ता में भारत, वेनेजुएला ने दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी का संकल्प लिया

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मोदी और रोड्रिगेज के बीच वार्ता में भारत, वेनेजुएला ने दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी का संकल्प लिया

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  • Publish Date - June 4, 2026 / 07:35 PM IST,
    Updated On - June 4, 2026 / 07:35 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ व्यापक वार्ता की, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों, फार्मास्यूटिकल, कृषि और ऑटोमोबाइल सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

बैठक में दोनों देशों ने अपनी जरूरतों पर आधारित दीर्षकालिक ऊर्जा साझेदारी स्थापित करने का संकल्प भी लिया।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की ओर से अप्रैल से वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में तेजी आई है। यही नहीं, वेनेजुएला भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बनकर भी उभरा है।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि बैठक में रोड्रिगेज का स्पष्ट संदेश था कि उनका देश भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार और इस तथ्य के मद्देनजर भारत को “पसंदीदा ऊर्जा भागीदार” के रूप में देखता है कि वह आने वाले कई वर्षों तक ऊर्जा बाजार में एक स्थिर खरीदार बना रहेगा।

टंडन ने बताया कि जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ऊर्जा संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है और इसमें ‘अपस्ट्रीम’ (खोज और उत्पादन) और ‘डाउनस्ट्रीम’ (शोधन और वितरण) दोनों गतिविधियां शामिल होंगी।

उन्होंने कहा, “वार्ता में मुख्य रूप से ऊर्जा साझेदारी स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। वे (वेनेजुएला) भारत को आने वाले कई वर्षों तक एक स्थिर और भरोसेमंद खरीदार के रूप में देखते हैं। इसलिए, भारत और वेनेजुएला के लिए ऊर्जा क्षेत्र में, मिलकर काम करने की पूरी संभावना एवं अनुकूलता है।”

उन्होंने बताया कि वार्ता में भारतीय पक्ष ने वेनेजुएला पर ओएनजीसी विदेश के 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक के लाभांश बकाये का मुद्दा भी उठाया।

टंडन ने एक सवाल के जवाब में कहा, “यह हमारा पैसा है। वे (वेनेजुएला) इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर हैं।”

उन्होंने बताया कि मोदी-रोड्रिगेज की वार्ता में समग्र द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी का अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श हुआ।

टंडन ने कहा, “वेनेजुएला संसाधनों से समृद्ध देश है। वहां केवल खनिज ही नहीं, बल्कि सोना, हीरे और अन्य धातु भी पाए जाते हैं। इसलिए, खनन की अपार संभावनाएं हैं। वास्तव में इस बात पर चर्चा हुई कि उनके पास मौजूद संभावित भंडारों का आकलन कैसे किया जाए या क्या हम इस क्षेत्र में सहयोग कर सकते हैं।”

उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब देने से परहेज किया कि क्या जनवरी में अमेरिकी सेना की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद वेनेजुएला में हुए सत्ता परिवर्तन पर बैठक में चर्चा हुई।

टंडन ने कहा, “हम सब जानते हैं कि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन हुआ था। हम एक ऐसी सरकार के साथ काम कर रहे हैं, जो दोस्ताना रुख रखती है और भारत के साथ साझेदारी चाहती है। हम भी वैसा ही सहयोग देना चाहते हैं। और यह मत भूलिए कि वेनेजुएला पारंपरिक रूप से द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर हमारा घनिष्ठ मित्र रहा है।”

उन्होंने बताया कि वार्ता में ब्रिक्स पर भी चर्चा हुई, जिसमें वेनेजुएला ने समूह की अध्यक्षता के लिए भारत और प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की।

‘ब्रिक्स’ 11 देशों के बीच अंतर-सरकारी विचार-विमर्श और सहयोग के लिए गठित समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इंडोनेशिया शामिल हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मोदी और रोड्रिगेज ने द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण पहलुओं की समीक्षा की और ऊर्जा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा एवं ऑटोमोबाइल सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की नयी संभावनाएं खंगालीं।

जायसवाल ने कहा, “दोनों नेताओं ने पारस्परिक हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने द्विपक्षीय साझेदारी को गहरा करने और ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।”

‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है, जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित या अविकसित के रूप में जाना जाता है। ये देश मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।

जनवरी में अमेरिकी बलों के तत्कालीन राष्ट्रपति मादुरो को हिरासत में लेने के बाद रोड्रिगेज ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला था।

भारत कभी वेनेजुएला के कच्चे तेल का प्रमुख शोधक था और एक वक्त में वह रोजाना चार लाख बैरल से अधिक तेल आयात करता था। हालांकि, अमेरिका के व्यापक प्रतिबंधों और अनुपालन संबंधी जोखिमों के कारण 2020 में वेनेजुएला से तेल खरीद लगभग बंद हो गयी थी।

मादुरो को हिरासत में लेने के बाद अमेरिका ने प्रतिबंधों में ढील की घोषणा की, जिसके बाद भारत ने वेनेजुएला से एक बार फिर कच्चे तेल की खरीद शुरू की। हाल के हफ्तों में भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने पश्चिम एशिया संकट के कारण वेनेजुएला से तेल आयात काफी बढ़ा दिया है।

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जिसमें विदेश, अर्थव्यवस्था एवं वित्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संचार एवं सूचना तथा परिवहन मंत्री शामिल हैं।

वेनेजुएला का प्रतिनिधिमंडल भारत की प्रौद्योगिकी और औद्योगिक क्षमताओं के बारे में जानकारी हासिल करने और सहयोग के अवसरों का पता लगाने के लिए ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल और ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ी कई सुविधाओं का दौरा करेगा।

ऐसी खबरें हैं कि रोड्रिगेज गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की रिफाइनरी का दौरा कर सकती हैं।

टंडन ने कहा, “वेनेजुएला की नेता को ऊर्जा क्षेत्र में भारत को हासिल प्रगति और उन्नत प्रौद्योगिकी से अवगत कराया जाएगा।”

भारत और वेनेजुएला के बीच रिश्ते सौहार्दपूर्ण रहे हैं। मार्च 2005 में तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की भारत यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को महत्वपूर्ण गति प्रदान की थी।

दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत सहयोग है। ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) का कॉर्पोरेशन वेनेजोलाना डेल पेट्रोलियो (सीवीपी) के साथ संयुक्त उद्यम है।

यह संयुक्त उद्यम ‘पेट्रोलेराइंडोवेनेजोलाना एसए’ के ​​नाम से जाना जाता है और सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र में तेल के उत्पादन और अन्वेषण का काम करता है, जिसमें ओवीएल की 40 फीसदी हिस्सेदारी है।

भाषा पारुल रंजन

रंजन