नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास द्वारा नियुक्त एक अमेरिकी लॉबिंग कंपनी ने एक सार्वजनिक दस्तावेज में खुलासा किया है कि उसने प्रस्तावित व्यापार समझौते और ऑपरेशन सिंदूर की “मीडिया कवरेज” सहित कई मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत करने में मिशन की मदद की।
कंपनी ‘एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी’ ने विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (एफएआरए) के तहत अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) को विवरण प्रस्तुत किया।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय दूतावास ने कहा कि अमेरिका में विदेशी दूतावासों और व्यावसायिक संगठनों के लिए ‘लॉबिस्ट’ और सलाहकारों की सेवाएं लेना एक सामान्य प्रक्रिया है।
एफएआरए की वेबसाइट पर उपलब्ध एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में अप्रैल और दिसंबर 2025 के बीच की अवधि के लिए भारतीय मिशन को दी गई सहायता का उल्लेख किया गया है।
विवरण से पता चला कि फर्म ने 10 मई को ट्रंप प्रशासन के चार अधिकारियों – व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर और रिकी गिल (राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद) से संपर्क करने में दूतावास की मदद की – ताकि “ऑपरेशन सिंदूर की मीडिया कवरेज पर चर्चा की जा सके”।
उस दिन भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन से चल रहे सैन्य संघर्ष को रोकने पर सहमति बनी थी।
फर्म द्वारा प्रदान की गई सहायता में भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों के बीच बैठकों, फोन कॉल और ईमेल की व्यवस्था करना शामिल था।
दूतावास ने कहा, “अमेरिका में दूतावासों, निजी और कारोबारी संगठनों का अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए लॉबिस्ट और सलाहकारों की सेवाएं लेना एक सामान्य प्रक्रिया है।”
उसने कहा, “भारतीय दूतावास ने 1950 के दशक से लेकर अब तक की सरकारों के तहत स्थानीय प्रथाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप ऐसी कंपनियों की सेवाएं ली हैं।”
इन विवरणों से यह भी पता चलता है कि दूतावास ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल की बैठकें कराने का अनुरोध किया था।
“अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता की स्थिति पर चर्चा” विषय के अंतर्गत दूतावास की सहायता करने के संबंध में कई प्रविष्टियां की गईं।
एक अन्य लॉबिंग फर्म, सीडेन लॉ एलएलपी द्वारा किए गए अलग खुलासों से पता चला कि उसने पाकिस्तान को अमेरिका के साथ दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी स्थापित करने में कैसे मदद की और भारत के साथ उसके संघर्ष के दौरान उसे समर्थन दिया।
भाषा प्रशांत वैभव
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