नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए एमके-84 के समान 1000 किलोग्राम वजनी हवाई बम के स्वदेशी डिजाइन और विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ को बढ़ावा देना है। वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इस परियोजना के दो चरण होंगे। पहले चरण में छह प्रोटोटाइप (सक्रिय और निष्क्रिय) का डिजाइन और विकास शामिल है, जिसमें संबंधित टेल यूनिट और उपकरण भी शामिल हैं।
दूसरा चरण खरीद का है, जो योग्य विकास एजेंसियों को प्रस्ताव के लिए वाणिज्यिक अनुरोध (आरएफपी) जारी करने के साथ शुरू होगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रणाली भारतीय वायुसेना द्वारा वर्तमान में संचालित रूसी और पश्चिमी मूल के विमानों (दोनों के साथ) सुसंगत होने के लिए बनाई गई है।
अधिकारी ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 के प्रावधानों के तहत 1,000 किलोग्राम के हवाई बम (एमके-84 के समान) के डिजाइन, विकास और खरीद के लिए टेल यूनिट और संबंधित उपकरणों के साथ अभिरुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) जारी की है।
यह परियोजना ‘मेक-II’ (उद्योग-वित्तपोषित) उप-श्रेणी के तहत कार्यान्वित की जाएगी, जिसके बाद ‘बाय (इंडियन-आईडीडीएम)’ श्रेणी के तहत खरीद की जाएगी।
आईडीडीएम का अर्थ है स्वदेशी रूप से डिजााइन, विकसित और निर्मित। अधिकारियों ने बताया कि डीएपी 2020 के प्रावधानों के अनुसार ‘बाय (इंडियन-आईडीडीएम)’ श्रेणी के तहत कुल 600 हवाई बम खरीदने की योजना है।
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में एमके-84 श्रेणी के सामान्य प्रयोजन बम विदेश के मूल उपकरण निर्माताओं से खरीदे जाते हैं और भारतीय वायुसेना में सेवा में हैं।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित हवाई बम को ‘प्राकृतिक रूप से विखंडनीय, उच्च क्षमता वाला गोला-बारूद बताया गया है जो दुश्मन के लक्ष्यों के विरुद्ध उच्च विस्फोटक प्रभाव और अधिक दबाव (पीओपी) उत्पन्न करने में सक्षम है।
अधिकारी ने बताया कि परियोजना का पहला चरण चयनित विकास एजेंसियों द्वारा किया जाएगा, जिसमें एकल-चरण समग्र परीक्षण शामिल है।
विकास चरण में कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का होना अनिवार्य है। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के लिए अनुमानित समयसीमा अभिरुचि पत्र के जारी किये जाने से लेकर अनुबंध पर हस्ताक्षर करने तक लगभग ढाई वर्ष है।
इसमें प्रोटोटाइप विकास, उसके बाद उपयोगकर्ता परीक्षण और मूल्यांकन, वाणिज्यिक प्रक्रियाएं और अनुबंध को अंतिम रूप देने जैसे चरण शामिल हैं।
भारतीय वायु सेना इस प्रक्रिया को सुगम बनाएगी और स्वदेशी विकास को बढ़ावा देगी ताकि इसे परिचालन में बढ़ावा दिया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि परीक्षण भारत के भीतर वायुसेना की इकाइयों या अन्य निर्दिष्ट स्थानों पर आयोजित किए जाएंगे और इसमें वायुसेना के एक विशिष्ट विमान पर किये जाने वाले परीक्षण शामिल होंगे।
भाषा संतोष माधव
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