चेन्नई, 21 सितंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के तमिलनाडु प्रदेश सचिव पी. षणमुगम ने सोमवार को राज्य में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) से कहा कि वह वाम दलों की निष्पक्षता और कार्य-प्रणाली पर सवाल उठाने के बजाय द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के खिलाफ अपने पास मौजूद भ्रष्टाचार के सबूतों पर कार्रवाई करे।
लोक निर्माण एवं खेल मंत्री आधव अर्जुन द्वारा वाम दलों से राज्य की पूर्ववर्ती द्रमुक सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार पर अपनी चुप्पी तोड़ने को कहे जाने के कुछ दिनों बाद, माकपा के वरिष्ठ नेता षणमुगम ने पलटवार करते हुए कहा कि मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव में टीवीके उम्मीदवार अन्नाद्रमुक से दलबदल करने के कारण जनता के भारी आक्रोश का सामना कर रहे हैं।
षणमुगम ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए याद दिलाया, ‘मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बार-बार दावा किया है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं (द्रमुक शासनकाल में) के सबूतों वाली तीन महत्वपूर्ण फाइल उनकी टेबल पर रखी हैं और खुलने के लिए तैयार हैं। यदि सरकार के पास सबूत हैं, तो वह त्वरित कानूनी कार्रवाई करने की स्थिति में है।’
षणमुगम ने टीवीके पर निशाना साधते हुए कहा, ‘यह आश्चर्य की बात है कि इन दस्तावेजों पर कार्रवाई करने के बजाय सत्ता में बैठे लोग माकपा पर ही सवाल उठा रहे हैं।’ गौरतलब है कि माकपा, अन्य वाम दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के साथ मिलकर जोसेफ विजय सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है।
चुनाव प्रचार के दौरान राज्य की पिछली द्रमुक सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए अर्जुन ने वाम दलों को चुनौती दी थी कि वे इस मुद्दे पर खुलकर बोलें, क्योंकि वे कई वर्षों तक द्रमुक के सहयोगी रहे हैं।
अप्रैल के विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक के टिकट पर जीतने वाले के. मरागाथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा को क्रमश: मदुरंतकम और धारापुरम में टीवीके के ‘सीटी’ चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतारने के टीवीके के फैसले से राजनीतिक नैतिकता, मतदाता के जनादेश और अवसरवाद को लेकर एक तीखा वैचारिक और रणनीतिक टकराव पैदा हो गया है।
ये दोनों सीट पूर्व अन्नाद्रमुक विधायकों—कुमारवेल (मदुरंतकम) और सत्यभामा (धारापुरम)—के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं, जिन्होंने 2026 के राज्य विधानसभा चुनावों में ‘दो पत्ती’ चुनाव चिह्न पर विजयी रहने के बाद, जीत के एक महीने के भीतर ही टीवीके में शामिल होने के लिए इस्तीफा दे दिया था।
अनुसूचित जाति (सु) के लिए आरक्षित इन दोनों सीट को वापस जीतने के लिए, अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीसामी ने मदुरंतकम से पार्टी की पूर्व विधायक एस. कनिथा संपत और धारापुरम से वरिष्ठ पदाधिकारी के. भानुमती को मैदान में उतारा है। अन्नाद्रमुक के चुनाव प्रचार अभियान का मुख्य केंद्र इन दलबदलू उम्मीदवारों द्वारा जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात करने का मुद्दा रहने की उम्मीद है-एक ऐसा मुद्दा जिसे वाम दल भी लगातार उठाते रहे हैं।
टीवीके सरकार को बिना शर्त समर्थन दे रहे वाम दलों ने मदुरंतकम से माकपा नेता पी. सुगांधी और धारापुरम से भाकपा के पी. लक्ष्मणन को उम्मीदवार बनाया है।
आगामी उपचुनाव को लेकर माकपा नेता ने दावा किया कि टीवीके उम्मीदवारों को जमीन पर भारी जनआक्रोश का सामना करना पड़ रहा है, और कई जगहों पर मतदाता उनके चुनाव प्रचार दलों को खदेड़ रहे हैं।
उन्होंने मतदाताओं के इस गुस्से के लिए सीधे तौर पर ‘राजनीतिक अवसरवाद’ को जिम्मेदार ठहराया। षणमुगम ने कहा कि दलबदलुओं ने मतदाताओं को अपने अचानक इस्तीफे और पार्टी बदलने के बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
षणमुगम ने कहा, ‘नागरिक इस बात से नाराज हैं कि ‘दो पत्ती’ चुनाव चिह्न पर जीतने वाले विधायकों ने सिर्फ एक अलग बैनर के तहत दोबारा चुनाव लड़ने के लिए महज तीन सप्ताह के भीतर अपने सार्वजनिक जनादेश को फेंक दिया।’
वाम दलों के स्वतंत्र राजनीतिक रुख की पुष्टि करते हुए षणमुगम ने स्पष्ट किया कि माकपा एक सैद्धांतिक दोहरी नीति पर काम करती है-जन-समर्थक कानूनों का समर्थन करना और जन-विरोधी नीतियों का पुरजोर विरोध करना, भले ही सत्ता में कोई भी दल हो।
भाषा अमित पवनेश
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