नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गृह मंत्रालय के उस आदेश को मंगलवार को रद्द कर दिया, जिसमें महाराष्ट्र कैडर के 1997 बैच के एक आईपीएस अधिकारी की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) की अर्जी खारिज कर दी गई थी। वह 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों में भाग लेने और दो अन्य शिकायतों को लेकर अनुशासनात्मक कार्यवाही का सामना कर रहे हैं।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने फैसला सुनाया कि केंद्र सरकार को अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के तहत स्वतंत्र रूप से वीआरएस आवेदन स्वीकार करने का अधिकार है, लेकिन यह असीमित नहीं है और कुछ शर्तों के साथ लागू होता है।
पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार को अधिकारी अब्दुर रहमान के वीआरएस आवेदन की नये सिरे से जांच करनी होगी और तीन दिन के भीतर निर्णय लेना होगा।
रहमान के खिलाफ 24 अप्रैल 2022 को आरोप पत्र जारी किया गया, जिसमें उन पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में याचिका दायर करने और कैट द्वारा अंतरिम राहत न दिए जाने के बाद 12 दिसंबर 2019 से कर्तव्यों का पालन न करने के कथित कदाचार और नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के खिलाफ सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज कराने के साथ-साथ विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने का आरोप लगाया गया था।
उन पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज कराने और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की पेशकश करने संबंधी जानकारी सोशल मीडिया पर प्रकाशित करने का भी आरोप लगाया गया था।
राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर 2019 को रहमान के वीआरएस आवेदन पर विचार किया था और केंद्र सरकार को इसे स्वीकार करने की सिफारिश की थी।
हालांकि, 25 अक्टूबर 2019 को केंद्र ने इस आधार पर आवेदन खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही अभी लंबित है।
भाषा सुभाष संतोष
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