ईरान ने भारत से लौट रहे ‘निहत्थे’ जहाज पर अमेरिकी हमले की निंदा की

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ईरान ने भारत से लौट रहे ‘निहत्थे’ जहाज पर अमेरिकी हमले की निंदा की

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 12:55 PM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 12:55 PM IST

नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने के दो दिन बाद ईरान ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि ‘‘निहत्थे जहाज पर हमले की सजा जरूर दी जाएगी।’’

ईरान का फ्रिगेट ‘आईआरआईएस देना’ भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन’ में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई। यह घटना फारस की खाड़ी के बाहर अमेरिका-ईरान संघर्ष के एक बड़े विस्तार के रूप में देखी जा रही है।

भारत यात्रा पर आए ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने कहा कि आईआरआईएस देना युद्ध की स्थिति में नहीं था और मिलन नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था। उन्होंने कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। वह जहाज हमारे भारतीय मित्रों के निमंत्रण पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में शामिल हुआ था। वह औपचारिक कार्यक्रम था। जहाज पर हथियार नहीं थे और वह निहत्था था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन अभ्यासों में भाग लेने वाले कई युवा ईरानी नाविकों ने अपनी जान गंवा दी। जिन्होंने यह काम किया है, वे दंड से बचेंगे नहीं।’’

आईआरआईएस देना भारतीय नौसेना के प्रमुख बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘मिलन’ का हिस्सा था। यह युद्धपोत पिछले महीने विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में भी शामिल हुआ था।

खतीबजादेह ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून को ‘‘चुनिंदा तरीके से लागू करना’’ स्वीकार्य नहीं है।

ईरानी उप विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर हमला हुआ है और हमें इन अत्याचारों के खिलाफ एकजुट होना होगा। अमेरिकियों ने एक दूसरे देश के प्रमुख की हत्या कर दी है। यदि यह नया मानक बन गया, तो दुनिया का कोई भी देश अन्य देशों के साथ सामान्य कूटनीतिक संबंध नहीं रख सकेगा।’’

उन्होंने कहा कि तेहरान की प्राथमिकता अब ‘‘हमलावर के खिलाफ अंतिम सीमा तक प्रतिरोध करना’’ है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अमेरिकियों और इजराइलियों के हमले और आक्रमण का सामना कर रहे हैं और वे ईरान को अधिकतम नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। जब हम बात कर रहे हैं, तब भी मेरे देशवासी लगातार हमलों का सामना कर रहे हैं।’’

खतीबजादेह ने कहा, ‘‘तेहरान लगातार हमलों की चपेट में है और हमारे पास आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह हमारे लिए बेहद वीरतापूर्ण और राष्ट्रीय संघर्ष है और हमें आक्रांता को रोकना होगा।’’

पश्चिम एशिया संकट पर भारत की स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में खतीबजादेह ने कहा, ‘‘ईरान और भारत के बीच गहरे सभ्यतागत संबंध हैं। हम भारत-फारसी संस्कृति और सभ्यता से जुड़े हैं और इसी सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप हम ईरान-भारत संबंधों को बहुत महत्व देते हैं।’’

उन्होंने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ ईरान की लड़ाई को ‘‘इतिहास, क्षेत्र, दुनिया और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्रतिरोध’’ बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रतिरोध जारी रखेंगे और यह इतिहास में दर्ज होगा। ईरानी लोग बलिदान दे रहे हैं क्योंकि ईरान के खिलाफ उग्र और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार हो रहा है। जैसे ही वे आक्रामकता रोकेंगे, क्षेत्र में एक नयी गतिशीलता आएगी।’’

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले में मौत हो गई थी।

भारत ने बृहस्पतिवार को खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया। इससे पहले विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि उसने इस हत्या और श्रीलंकाई तट के पास अमेरिकी हमले में ईरानी जहाज डुबोए जाने पर चुप्पी साध रखी है।

सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने इजराइल और अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। ये हमले संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों में स्थित ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए।

पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों के हमलों और जवाबी हमलों से संघर्ष काफी फैल गया है, जिससे पश्चिम एशिया में लंबे युद्ध की आशंका बढ़ गई है।

भाषा गोला वैभव

वैभव