नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को भाजपा सदस्य घनश्याम तिवाड़ी ने होटल और ढाबों में खाना परोसने या उसकी पैकेजिंग के लिए काली प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग किए जाने का मुद्दा उठाया और सरकार से इस पर रोक लगाने की मांग की।
भाजपा सदस्य ने विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश के अनेक होटल और ढाबों में काले रंग की प्लास्टिक के बर्तनों मे भोजन परोसा जा रहा है या पैकेजिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह काली प्लास्टिक सामान्य प्लास्टिक नहीं होती और यह इलेक्ट्रॉनिक कचरा या अन्य अवशिष्ट प्लास्टिक से तैयार की जाती है।
उन्होंने कहा कि जब काली प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म भोजन रखा जाता है तो सूक्ष्म प्लास्टिक कण या माइक्रो प्लास्टिक कण भोजन में घुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार यह माइक्रो प्लास्टिक कण मानव शरीर के अंदर प्रवेश कर रक्त में मिल सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
तिवाड़ी ने सरकार से अनुरोध किया कि होटल, ढाबों और अन्य स्थानों पर या भारतीय रेल में भोजन परोसने के लिए ऐसे प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाए तथा इसके स्थान पर सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल विकल्प की तलाश की जाए।
विशेष उल्लेख के जरिए ही भाजपा सदस्य अशोक सिंह ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड और मुरैना जिलों से जुड़ा मुद्दा उठाया और कहा कि यह वीरों की भूमि रही है जिसने देश को अनगिनत सपूत दिए हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन आज के युवा रोजगार की तलाश में पलायन के लिए मजबूर हैं और किसान अल्प आय तथा सिंचाई की सुविधा के अभाव में परेशान हैं
भाजपा के ही अजीत माधवराव गोपछड़े ने मराठवाड़ा और उसके आसपास के क्षेत्र में लंबित रेल परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की वहीं मनोनीत सुधा मूर्ती ने वजन काम करने वाली दवाइयों से जुड़ा मुद्दा उठाया। भाजपा के केसरीदेव सिंह झाला ने प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण का मुद्दा उठाया। भाजपा के ही नवीन जैन ने मरणोपरांत देहदान के प्रति जागरूकता में कमी का मुद्दा उठाया।
समाजवादी पार्टी के रामजीलाल सुमन ने आशा कार्यकर्ताओं की सेवा को स्थायी करने की मांग की और कहा कि करीब दो दशक से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में आशा कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सपा सदस्य ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और उन्हें बहुत कम मानदेय मिलता है।
उन्होंने सरकार से आशा कार्यकर्ताओं की सेवा को स्थायी करने तथा उन्हें बेहतर मानदेय दिए जाने की मांग की।
भाषा अविनाश रंजन
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